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योगी सरकार के एक ट्रिलियन के बजट मे शराबियों के लिए कोई विशेष व्यवस्था नही।

समाज जागरण डेस्क नोएडा

इससे भी बड़ा झूठ क्या होगा कि राम राज मे एक तरफ सरकार का नशा मुक्ति अभियान, दूसरी तरफ सरकार खुलवा रही है शराब की दुकान। योगी सरकार के एक ट्रिलियन की बजट मे शराबियों के लिए कोई विशेष व्यवस्था तक नही की गई है। जबकि शराब और पेट्रोल को भारत के अर्थव्यवस्था के वाहक माने जाते है। यही कारण है कि कोई भी सरकार शराब और पेट्रोल को जीएसटी के दायरे मे नही लाना चाहती है। कम से कम जीएसटी मे आने से शराब के साथ चखना की पैसे तो बचेगा। आम तौर पर पीने वाले सरकार के खजाने तो भरते है लेकिन सरकार के द्वारा इनके लिए कोई भी व्यस्था नही किए जाते है। आज भी नाली के किनारे बैठकर, ठेली पर खड़े होकर शराब पीने को मजबूर है। कई बार तो बोतल खरीदने के बाद इनके पास मे चखने तक के पैसे नही बचते है और नमक के साथ इनको शराब पीना पड़ता है। शराब सेहत के लिए कितना खतरनाक है यह तो मै नही बता सकता हूँ क्योंकि मै कैंसर विशेषज्ञ नही हूँ लेकिन शराब नही पीने से सरकार के खजाने पर जरूर फर्क पड़ता है।

15 जुलाई 2021 के अनुसार योगी सरकार के आने के बाद शराब के बिक्री मे 74% प्रतिशत का इजाफा दर्ज किया गया है। जबकि इससे प्राप्त होने वाले रेवेन्यू 100% तक आंकी गई है।

13 जुलाई 2024 को इंडिया टुडे मे छपी खबरो के मुताबिक उत्तर प्रदेश में 27,352 शराब की दुकानें हैं जो लगभग 20 करोड़ की आबादी की जरूरतों को पूरा करती हैं। पिछले 15 वर्षों में, राज्य में इन दुकानों की संख्या और शराब की बिक्री से उत्पन्न राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।

अखबार ने लिखा है कि –

यह अब एक सर्वविदित तथ्य है कि शराब पर वसूला जाने वाला उत्पाद शुल्क और शराब की दुकान संचालित करने के लिए भुगतान की जाने वाली लाइसेंस फीस भारत में राज्य सरकारों के लिए राजस्व के सबसे बड़े स्रोतों में से एक है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और आबादी वाले राज्य में, इसका मतलब राज्य के वार्षिक राजस्व का 10 प्रतिशत तक है। लगभग 20 करोड़ की आबादी के लिए, उत्तर प्रदेश में 27,352 शराब की दुकानें हैं। इसकी तुलना में, 1.5 करोड़ से कुछ अधिक लोगों वाली दिल्ली में 850 शराब की दुकानें हैं। वित्तीय वर्ष 2020-21 में उत्तर प्रदेश को शराब की दुकानों से उत्पाद शुल्क और लाइसेंस शुल्क से 30,061 करोड़ रुपये की कमाई हुई.

सूचना का अधिकार (आरटीआई) उत्तर में पिछले 15 वर्षों का डेटा प्रदान किया गया, जिसमें तीन सरकारें शामिल थीं, जिनमें भाजपा के योगी आदित्यनाथ, उनके पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी (सपा) के अखिलेश यादव और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती शामिल थीं।

योगी आदित्यनाथ की सरकार के चार साल – 2017-18 और 2020-2021 के बीच – 2,076 नई शराब की दुकानों को चार अलग-अलग प्रकार की खुदरा दुकानों यानी भारतीय शराब, विदेशी शराब, बीयर की दुकान और मॉडल शॉप में लाइसेंस मिला। इस अवधि में राज्य के राजस्व में 74 फीसदी का उछाल आया, जो 17,320 करोड़ रुपये से बढ़कर 30,061 रुपये हो गया।

यूपी शराब की नई राजधानी है- रिकॉर्ड राजस्व, होम बार, मॉडल शॉप। योगी सरकार इसे पसंद कर रही है । द प्रिंट मे 30 अक्टुबर 2023 मे यह खबर छपी है। अखबार ने लिखा है कि उत्तर प्रदेश ने शराब बिक्री के मामले मे कई स्टेट को पीछे छोड़ दिया है।

हिन्दुस्तान टाइम्स मे 11 मई 2023 को छपी एक खबर मुताबिक

उत्पाद शुल्क विभाग के आंकड़ों से पता चला है कि, यूपी में टिपलर प्रतिदिन ₹115 करोड़ की शराब गटक जाते हैं,

उत्तर प्रदेश में प्रयागराज टिप्परर्स हर दिन ₹115 करोड़ की शराब और बीयर गटक रहे हैं, जैसा कि प्रयागराज मुख्यालय वाले राज्य उत्पाद शुल्क विभाग द्वारा संकलित नवीनतम आंकड़ों से पता चलता है। आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, राज्य के लगभग हर जिले में हर दिन ₹2.5 करोड़ से ₹3 करोड़ से अधिक की शराब की बिक्री दर्ज की जाती है। यह केवल दो साल पहले की तुलना में एक महत्वपूर्ण वृद्धि है जब राज्य के निवासी प्रतिदिन ₹85 करोड़ की शराब और बीयर का उपभोग करते थे।

अखबार ने लिखा है : उत्पाद शुल्क विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “राज्य में ऐसे कई जिले हैं जहां एक दिन में 12 से 15 करोड़ रुपये की शराब और बीयर की खपत हो रही है।” आंकड़ों के मुताबिक, प्रयागराज में एक दिन में औसतन 4.5 करोड़ रुपये की शराब और बीयर बिक जाती है. भारी बिक्री के मामले में अग्रणी जिलों में शामिल हैं – नोएडा और गाजियाबाद (प्रतिदिन ₹13 से ₹14 करोड़), आगरा (प्रति दिन ₹12 से ₹13 करोड़), मेरठ (प्रतिदिन लगभग ₹10 करोड़), लखनऊ (एक दिन में ₹10 से ₹12 करोड़), कानपुर (प्रति दिन ₹8 से ₹10 करोड़), और वाराणसी (प्रति दिन ₹6 से ₹8 करोड़)।

सरकार हमेशा युवा किसान महिला दलित शोषित की बात करती है। यूपी मे बढ़ते पर्यटन पर दंभ भरने वाले योगी सरकार को प्रदेश मे शराब के बढ़ते बिक्री पर भी दंभ भरनी चाहिए। क्योंकि यह भी राज्य के लिए कम बड़ी उपलब्धि नही है। प्रदेश मे शराब पीने वालों की संख्या में लगातार वृद्धि ही तो प्रदेश को समृद्धि की ओर लेकर जायेगा। सरकार के द्वारा चलाये जा रहे नशा मुक्ति अभियान से प्रदेश मे नशेरियों की संख्या कम हो रहा हो ऐसा तो नही लगता है बल्कि ऐसा लगता है कि ये संख्या हर साल 30-40 प्रतिशत के दर से बढ़ ही रहे होंगे। राम राज्य की परिकल्पना अगर शराब बेचकर पूरी होती हो तो सरकार को निश्चित ही और प्रयास करनी चाहिए। प्रदेश के युवाओं का भविष्य क्या होगा यह तो समय बतायेगा लेकिन सरकारी खजाना जरूर भरेगा। आप देख रहे थे समाज जागरण


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