लालजी तिवारी
उमरिया
मध्यप्रदेश सरकार के साथ साथ जिले के कलेक्टर ने किसी भी दशा में जर्जर भवनों में स्कूल संचालित नहीं करने के आदेश दिए हैं, जिसके परिपालन में की जगहों पर कड़ाई से आदेश का पालन भी कराया जा रहा है, लेकिन मुख्यालय में ही स्कूलों की हालात ठीक नहीं है, जहां बच्चों को बैठा कर शिक्षा दीक्षा कराई जा रही है, साथ ही जर्जर भवन के अलावा स्कूल के बगल में एक खेत तालाब का रुप ले चुका है, जहां किसी भी दिन बड़ी अनहोनी होने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है। हम बता कर रहे हैं मुख्यालय से सटे वार्ड नंबर 3 लालपुर की जहां संचालित शासकीय हाई स्कूल चारों तरफ से खतरों से भरी पड़ी है, एक तरफ नेशनल हाईवे 43 का खतरा तो दूसरी तरफ अनावश्यक तालाब का बन जाना।
सैकड़ों बार लिखा जा चुका है पत्र
लालपुर वार्डवासियों की मानें तो पूर्व पार्षद सहित ग्रामीण व स्कूल प्रबंधन ने सैकड़ों बार संकुल प्राचार्य, बीआरसी करकेली, डीपीसी, डीईओ और जिला प्रशासन के आला अधिकारियों को सैकड़ों बार पत्र लिखकर इस समस्या से अवगत कराया जा चुका है लेकिन उसका हल आज दिनांक तक नहीं हो पाया है। बताया जाता है कि माध्यमिक विद्यालय से जब इसे हाई स्कूल का दर्जा मिला तो सरकार और प्रशासन से हाई स्कूल की बिल्डिंग की भी मांग की गई थी, मगर माध्यमिक भवनों में ही हाई स्कूल का संचालन आज 15 वर्षों से किया जा रहा है, हालात यह हैं कि सन् 1970 के आसपास की बनी यह बिल्डिंग आज जर्जर का रुप ले चुकी है,जो किसी समय धराशाही हो सकती है और कोई गंभीर घटना का रुप ले सकती है। आज 15 सालों से एक भी पत्र का जबाव संतोष जनक नहीं मिलने से लगातार बच्चों की संख्या में गिरावट देखी जा रही है, सभी उन समस्या भरे पन्नों का अधिकारियों ने क्या किया और इसका हल किसके पास है यह बताने वाला कोई नहीं है।
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