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*मोबाइल -लैपटॉप की रोशनी से बढ़ रहा आँखों पर दबाव: डॉ. मनीष श्रीवास्तव*

*डिजिटल आई स्ट्रेन से लेकर पोषण, स्वच्छता और मोबाइल उपयोग तक डॉ. श्रीवास्तव ने दिए टीनएजर्स, अभिभावकों और शिक्षकों के लिए विशेष दिशानिर्देश*


सुनील चिंचोलकर
रायपुर,छत्तीसगढ़। छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. मनीष श्रीवास्तव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में “टीनएजर के लिए आंखों की देखभाल: अपनी दृष्टि की शक्ति को समझें” विषय पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि तेजी से बढ़ते डिजिटल इस्तेमाल और स्क्रीन टाइम के कारण किशोरों में आंखों से जुड़ी समस्याएं खतरनाक स्तर तक बढ़ रही हैं। ऐसे में समय रहते रोकथाम आवश्यक है।



*मुख्य बिंदु – टीनएजर के लिए डॉ. श्रीवास्तव के निर्देश*

1. डिजिटल आई स्ट्रेन (DES) से बचाव

डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि मोबाइल, लैपटॉप और टैबलेट की बढ़ती स्क्रीनिंग आंखों को लगातार थकान देती है।

20-20-20 नियम अपनाएं।

जानबूझकर पलकें झपकाएं, क्योंकि स्क्रीन टाइम में पलकें 60% तक कम झपकती हैं।

सही पोस्चर पर ध्यान दें ताकि आंखों और गर्दन पर तनाव न आए।

2. बाहर खेलने का समय—मायोपिया रोकने की कुंजी

उन्होंने बताया कि प्राकृतिक धूप में समय बिताना निकट दृष्टि दोष (मायोपिया) को रोकنے کا प्रभावी उपाय है।

धूप में जाते समय 100% UV A/B प्रोटेक्शन वाले सनग्लासेस पहनना अनिवार्य बताया।

3. पोषण—आंखों के लिए सुपरफूड्स

ल्यूटिन व ज़ेक्सैन्थिन: पालक, केल, अंडे

ओमेगा-3: अखरोट, चिया सीड्स, अलसी, फैटी फिश

विटामिन C/E: संतरा, स्ट्रॉबेरी, बादाम

हाइड्रेशन: पर्याप्त पानी पीना आवश्यक

4. कॉन्टैक्ट लेंस और स्वच्छता

डॉ. श्रीवास्तव ने कहा कि किशोरों में लापरवाही के कारण आंखों के संक्रमण बढ़ रहे हैं।

लेंस हमेशा साफ हाथों से पहनें।

आंखों में लाली, दर्द, पानी आना जैसे लक्षण को कभी नजरअंदाज न करें।


5. सालाना आंखों की जांच अनिवार्य

उन्होंने कहा कि ग्लूकोमा जैसी कई बीमारियां बिना लक्षण के शुरू होती हैं, इसलिए हर वर्ष पूर्ण नेत्र जांच कराना अनिवार्य है।

6. खेलों में सुरक्षात्मक आईवियर

क्रिकेट, फुटबॉल जैसे खेलों में तेज़ गति वाली गेंदें आंखों को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
टीनएजर्स को स्पोर्ट्स प्रोटेक्टिव आईवियर पहनने की सलाह दी गई।


(B) अभिभावकों के लिए डॉ. श्रीवास्तव के निर्देश

14 वर्ष से पहले बच्चों को पर्सनल मोबाइल न दिया जाए।

टीवी एक घंटे से ज्यादा न देखने दें।

सोशल मीडिया का उपयोग 16 वर्ष के बाद ही करें।


(C) शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण दिशानिर्देश

छात्रों को डिजिटल माध्यम से प्रोजेक्ट/होमवर्क न दें, ताकि कम उम्र में मोबाइल की लत विकसित न हो।


निष्कर्ष

डॉ. मनीष श्रीवास्तव ने कहा कि
“आंखें जीवन की रोशनी हैं। आज की जागरूकता ही आने वाले समय की स्पष्ट दृष्टि तय करेगी।”
उन्होंने टीनएजर्स से आग्रह किया कि इन दिशानिर्देशों को गंभीरता से अपनाएं और अभिभावकों व शिक्षकों से सहयोग की अपील की।


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