समाज जागरण अनिल कुमार
हरहुआ वाराणसी।
जनजातीय शोध एवं विकास संस्थान, वाराणसी के तत्वावधान में विगत वर्षों की भॉति इस वर्ष भी संस्थान के आदिवासी लोक कवि बाबू कन्हैया लाल गोंड सभागार गनेशपुर में ‘‘गोंडवाना साम्राज्य के महाराजा शंकर शाह एवं पुत्र कुवंर रघुनाथ शाह जी का 167वॉ शहीद एवं बलिदान दिवस’’ का आयोजन किया गया।
।।इस अवसर पर मुख्य अतिथि बृजभान मरावी, सदस्य, उ0 प्र0 लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान, संस्कृति विभाग, लखनऊ, उत्तर प्रदेश सरकार ने सर्वप्रथम महाराजा शंकर शाह एवं पुत्र कुवंर रघुनाथ शाह जी के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलन कर शहीद दिवस कार्यक्रम का उद्घाटन किया। अपने सम्बोधन में मुख्य अतिथि ने कहा कि भारत की आजादी के लड़ाई मेें सर्वप्रथम शंख नाद की घोषणा भारत के आदिवासी महानायकों ने किया जो 1755 से लेकर 1947 तक चली जिसमें देश के लाखों आदिवासी महिला/पुरूष महानायकों ने अपनी बलिदान देकर अमर हो गये।
गोंडवाना सम्राज्य के जबलपुर के गोंड मरावी वंश के महाराजा शंकर शाह एवं पुत्र कुॅवर शाह मरावी जी ने सन् 1857 में ब्रिटिश हूकुमत की गुलामी को ठुकराते हुए अपने गणराज्य, प्रजा तथा जल-जंगल-जमीन की रक्षा करते हुए ‘‘मावा माटी-मावा राज’’ की संकल्प के प्रति समर्पित होकर अंग्रेजो को नाको चना चबाने के लिए मजबूर कर दिया, जिससे हतास होकर अंग्रेजो ने छल कपट कर धोखा से इन्हे गिरफ्तार किया और दिनांक 18 सितम्बर 1857 को अंग्रेजो द्वारा पिता एवं पुत्र को तोप के मुह पर बांधकर उड़ा दिया। जो इतिहास में सबसे भयावह एवं दर्दनाक घटना बनी।
श्री मरावी ने कहा कि भारत के आजादी की लड़ाई में सैकड़ो गोंड राजा-महाराजाओं ने अपना अपना बलिदान देकर भारत को आजादी दिलाई है जिसे हम भूल नही सकते और इन्हे अपना हीरो एवं भगवान मानकर जीवन भर पुजते रहेगें। महान आदिवासी स्वाधीनता संग्राम सेनानी के राष्ट्र के प्रति त्याग और बलिदान देश तथा आदिवासी समुदाय के लिए गौरव एवं प्रेरणा स्रोंत है। जिनको कभी भुलना नही चाहिए।
उक्त अवसर पर मनकेशरा देवी, संगीता पटेल, काजल पाल, पूजा, कंचन यादव, शिबू, अभय सिहं, रवि कुमार, बलिराम गोंड, अंशू गोंड,शिवम गोंड, राजकुमार सिंह, अमन कुमार, हर्ष पटेल, रविन्द्र कुमार, विकास कुमार, निकीता शाह आदि लोग उपस्थित रहे तथा संचालन रवि कुमार गौतम ने किया।
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