आदिवासी सुनील त्रिपाठी/ समाज जागरण
चोपन/ सोनभद्र। विगत 100 वर्षों से अधिक परंपरागत तरीके से अनुष्ठानिक श्री रामलीला का सिंदुरिया की ऐतिहासिक रामलीला प्रांगण में तीसरे दिन प्रभु श्री राम की अपने सभी भाइयों एवं इष्ट मित्रों के साथ बाल लीला जिसमें पत्ते की गाय बनाकर उनको जंगल चराने के लिए ले जाना जंगल में मिले मृगा शिकार, पिता के द्वारा बार-बार बुलाए जाने पर भोजन के लिए ना आना माता के बुलाने पर लीला करते हुए भागते रहना बहुत बार आग्रह करने पर भोजन के लिए आना फिर उनका छुरा करण नामकरण की लीला का बड़ा ही रोमांचित मंचन किया गया भगवान श्री राम कुछ बड़े होते हैं तो उनको गुरु जी के आश्रम में शिक्षा ग्रहण के लिए जाना उसके बाद महर्षि विश्वामित्र की यज्ञ का विध्वंस निश्चरों द्वारा किए जाने पर महाराज दशरथ से प्रभु राम को यज्ञ की रक्षा के लिए विश्वामित्र के साथ वन को जाने के लिये निकल पड़े |इस अवसर पर रामलीला समिति के अध्यक्ष सुरेश पांडेय, विद्या शंकर पांडेय, व्यास. मुरली तिवारी. डा० रामगोपाल तिवारी, नरसिंह त्रिपाठी, राम जानकी पांडेय, उदय नारायण पांडेय, राम नारायण पांडेय, वीरेंद्र पांडेय, प्रेमशंकर पांडेय, दिनेश पांडेय. विजय पांडेप. महावीर पांडेय. विनोद पांडेय. नागेंद्र पांडेय. राकेश पांडेय. विशाल पांडेय. प्रशांत पांडेय. राधारमण पांडेय. कामेश्वरी चौबे. गोविंद राम चौबे. प्रभु नारायण पांडेय. अवधेश पांडेय. एवं समस्त पांडेय परिवार ग्रामीण मौजूद रहे।
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