समाज जागरण अनिल कुमार
हरहुआ वाराणसी।
आज मंगलवार को प्रत्येक वर्ष की भाॅति इस वर्ष भी आदिवासी जनजाति समाज की अपनी आदिम रीति-रिवाज परम्परा एवं टोटम की सांस्कृतिक विरासत के विकास एवं संरक्षण के क्रम में ‘‘उ0 प्र0 राज्य की अति प्राचीन आदिवासी भोजली जात्रा महोत्सव तिहार-2025’’ पर्व आयोजन पूर्वाहन 11 बजे गोंड वीरांगना महारानी दुर्गावती स्मृति भवन न्यास, चक्का एवं जनजातीय शोध एवं विकास संस्थान, वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजन में किया गया।
सर्वप्रथम इस अवसर दिनेश कुमार गोंड, अध्यक्ष-महारानी दुर्गावती स्मृति भवन न्यास, चक्का, हरहुआ वाराणसी ने बताया कि भोजली महोत्सव मनाने के लिए आस-पास व देश के कोने-कोने से आये आदिवासी समाज के सैकड़ों परिवार के महिला/पुरुष एवं युवाओं ने अपने अपने घरों से भोजली/जरई लेकर, नया वत्र धारण कर भोजली दाई पेन ठाना गोंड वीरांगना महेश दुर्गावती स्मृति भवन परिसर में उपस्थित हुए। उसके पश्चात आदिवासी भुमकाओं/गुरूओं द्वारा गोंगों प्रारम्भ किया गया और साथ ही करमा व गरद नृत्य गीत कर धूम-धाम से भोजली जात्रा का आयोजन किया गया।
भोजली जात्रा दुर्गावती भवन के होते हुए चक्का गेट, पंचक्रोशी रोड बड़ोदव पेनठाना होते हुए वरूणा नदी के तट पर प्राचीन भोजली घाट पर भोजली का विर्सजन कर मांदर एवं सिंघा बाजा तथा हुडु़क मजिरा के धुन पर जम के नृत्य-गीत किया । उसके बाद जरई को अपने बड़ो के कान पर रख कर आर्शिवाद प्राप्त किए और बचे हुए भोजली को अपने घरों के अनाज भण्डार में रखने हेतु ले गए।
भोजली पर्व मनाने का मुख्य उद्देश्य आदिवासी एकता और भाईचारा के बंधुत्व का एक प्रतीक है जो की सामुहिक, और सांस्कृतिक जीवन का पहचान है।
कार्यक्रम को सफल बनाने में गब्बर गोंड, दीना गोंड, राम सागर गोंड, विनोद मरावी, अनील कुमार, सुनिल कुमार, प्रीतम कुमार, उमेश कुमार, सूरज कुमार, किशन गोंड, अमीत कुमार, मनभावती देवी, मधुगोंड, रागीना गोंड, अरविन्द गोंड, लौटन गोंड, बलिराम गोंड, राजेन्द्र प्रसाद, रामदयाल गोंड, शुशील कुमार गोंड आदि जनपद वाराण्सी सहित, चंदौली, मीरजापुर, गाजीपुर, सोनभद्र आदि जनपदों के लगभग 300 से अधिक महिला पुरूष सम्मिलित होकर भोजली जात्रा महोत्सव को सफल बनाया।
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