दैनिक समाज जागरण फारूक अंसारी
धामपुर नौजवान आलिमे दीन और कारी इसरार अहमद का कहना है कि अल्लाह को गर्मी का रोज़ा और ठंड की वज़ू बुहत पसंद है लिहाज़ा जो हज़रात गर्मी का बहाना करके रोज़ा छोड़ने की फ़िराक़ में हैं वो ऐसा बिल्कुल ना करें रोज़े की फज़ीलत बयान करते हुए कारी इसरार ने कहा कि इंसान जो भी इबादत करता है वो सब इंसान की नज़रों में आ जाती है मगर रोज़ा एक ऐसी इबादत है जो सिर्फ बंदा और अल्लाह ही जानता है कि उसका रोज़ा है या नहीं इसका मतलब है कि रोज़ा अल्लाह और बंदे के बीच का मामला है और यही वजह है कि सब इबादात की नैकियां फ़रिश्ते लिखते हैं मगर रोज़े की जज़ा बंदे को अल्लाह ही अता फरमाए गा और जिस अमल की जज़ा अल्लाह पाक अता फरमाए उसका कहना ही क्या है कारी इसरार साहब ने कहा कि जिस दिन क़यामत के रोज़ सूरज सवा नेज़े पर होगा और हर इंसान परेशान होगा रोज़ेदार अर्श आज़म के साये में आराम कर रहा होगा और उसे पता भी नहीं चलेगा कि कब क़यामत आई और कब चली गई लिहाज़ा हमें चाहिए कि हम गर्मी से घबराकर अपना रोज़ों का सिलसिला तरक ना करें बल्कि और इबादात में इजाफा करें ताकि हम सब पर अल्लाह की रहमते नाज़िल होती रहें
Discover more from समाज जागरण
Subscribe to get the latest posts sent to your email.



