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जनगणना ड्यूटी में ‘मुँहदेखी’ का आरोप गहराया, शिक्षकों में नाराजगी — ट्रेनिंग के बाद नाम कटे, भत्ता भी नहीं मिला

अनूपपुर। जिले में जनगणना ड्यूटी को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। शिक्षकों ने ड्यूटी आवंटन में पारदर्शिता की कमी और “मुँहदेखी” के आधार पर नाम जोड़ने-हटाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। इस पूरे मामले में अब जिला मुख्यालय स्थित एकलव्य विद्यालय में आयोजित 3 दिवसीय प्रशिक्षण (ट्रेनिंग) भी सवालों के घेरे में आ गया है।

सूत्रों के अनुसार, जनगणना कार्य के लिए बड़ी संख्या में शिक्षकों को एकलव्य विद्यालय में 3 दिनों की अनिवार्य ट्रेनिंग दी गई, जिसमें उन्होंने पूरी उपस्थिति दर्ज कराई और प्रशिक्षण प्राप्त किया। लेकिन हैरानी की बात यह है कि ट्रेनिंग पूरी करने के बाद भी कई शिक्षकों के नाम ड्यूटी सूची से हटा दिए गए। इससे शिक्षकों में भारी नाराजगी है और वे इसे सीधे तौर पर व्यवस्था की खामी बता रहे हैं।

शिक्षकों का कहना है कि एक ओर उन्हें प्रशिक्षण के लिए बुलाया गया, समय और श्रम लगाया गया, वहीं दूसरी ओर बाद में बिना किसी स्पष्ट कारण के उनके नाम काट दिए गए। कई मामलों में यह भी आरोप है कि कुछ शिक्षकों ने “जुगाड़” लगाकर अपने नाम हटवा लिए, जबकि अन्य को बिना कारण ड्यूटी में बनाए रखा गया।

मामले को और गंभीर बनाते हुए शिक्षकों ने यह भी आरोप लगाया है कि 3 दिवसीय ट्रेनिंग के बावजूद उन्हें शासन द्वारा निर्धारित ट्रेनिंग भत्ता, यात्रा खर्च और अन्य सुविधाएं भी नहीं दी गईं। इससे शिक्षकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है और असंतोष और बढ़ गया है।

ड्यूटी सूची में लगातार बदलाव, बिना लिखित आदेश के नाम हटाना और प्रशिक्षण के बाद भी चयन में बदलाव—इन सबने पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कई शिक्षकों ने प्रभावशाली लोगों के दबाव में नियमों की अनदेखी का आरोप भी लगाया है।

वहीं, इस पूरे मामले में प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। शिक्षकों का कहना है कि यदि जल्द ही इस मुद्दे पर पारदर्शिता नहीं लाई गई और निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई, तो वे सामूहिक रूप से उच्च अधिकारियों से शिकायत करने के साथ आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।

📌 शिक्षकों की प्रमुख मांगें:

जनगणना ड्यूटी की पूरी सूची सार्वजनिक की जाए

ड्यूटी में किए गए बदलावों का स्पष्ट कारण बताया जाए

एकलव्य विद्यालय में हुई 3 दिवसीय ट्रेनिंग के बाद नाम हटाने की जांच हो

जनगणना ट्रेनिंग भत्ता, यात्रा व्यय और अन्य सुविधाएं शीघ्र प्रदान की जाएं

दोषी अधिकारियों/कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए

अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या जनगणना जैसे महत्वपूर्ण कार्य में पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित हो पाता है या नहीं।


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