अवधेश कुमार गुप्ता
सदर संवाददाता समाज जागरण
सोनभद्र। करमा विकास खंड की ग्राम पंचायत तकिया में स्थित मस्जिद की दर्ज भूमि (गाटा संख्या 80, खाता संख्या 00487) पर कथित रूप से अवैध कब्जा कर रोड एवं नाली निर्माण कराए जाने का मामला अब प्रशासनिक स्तर पर पहुंच गया है।ग्रामीणों द्वारा दिए गए सामूहिक प्रार्थना पत्र के आधार पर उपजिलाधिकारी राबर्ट्सगंज ने प्रकरण में विधिक कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं,जिसके बाद पुलिस ने दोनों पक्षों को तलब कर वार्ता की, हालांकि समाधान नहीं निकल सका। सामूहिक प्रार्थना पत्र के बाद प्रशासन पूरी तरह से हरकत में आया आ गया है।
ग्राम पंचायत तकिया, पोस्ट सुकृत के दर्जनों ग्रामीणों – लल्लू खान, जुबैर अहमद, गुफरान तौफीक मिर्जा, सैफ, सहाबुद्दीन, मंसूर आलम, गयासुद्दीन, इरफान खान, एजाज, हबीब, हारून बेग, अजहरुद्दीन उर्फ राज खान, तनवीर मिर्जा, मेराज बेग, हकीक मिर्जा,अब्दुल केयूम, एखलाक खान, तनवीर, मुनव्वर अली, मंजूर आलम, सद्दाम खान, शाहनवाज आलम सहित अन्य ने उप जिलाधिकारी को सामूहिक प्रार्थना पत्र सौंपकर आरोप लगाया कि राजस्व अभिलेखों में मस्जिद के नाम दर्ज भूमि पर ग्राम पंचायत द्वारा सरकारी धन से जबरन निर्माण कराया गया है।
प्रार्थना पत्र में कहा गया कि यह निर्माण बिना विधिक प्रक्रिया, बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति और बिना संबंधित पक्ष/स्थानीय मुस्लिम समाज की सहमति के कराया गया, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं और गांव का माहौल तनावपूर्ण हो गया है। दिनांक 10 फरवरी 2026 को उपजिलाधिकारी उत्कर्ष द्विवेदी ने मामले को गंभीर मानते हुए राबर्ट्सगंज थाना प्रभारी को नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश भी दिये है।
बताते हैं कि एसडीएम के निर्देश के क्रम में 11 फरवरी 2026 को थाना राबर्ट्सगंज में दोनों पक्षों को बुलाया गया तथा मस्जिद की देखरेख से जुड़े लोगों तथा मामले को प्रमुखता से उठाने वाले इरशाद अहमद की उपस्थिति में वार्ता करायी गयी। इस बाबत गांव के अन्य लोग भी थाने में मौजूद रहे।बैठक के दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस के साथ ही काफी नोंक-झोंक हुई। आलम यह रहा कि सहमति बनने के बजाय विवाद और बढ़ गया। आरोप है कि तकिया निवासी सरफराज अहमद उर्फ मुन्ना खान ने इरशाद अहमद को देख लेने तक की धमकी देते हुए कोतवाली परिसर से बाहर निकलते समय मारपीट की चेतावनी भी दी हालांकि पुलिस की मौजूदगी में स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया अन्यथा किसी बड़ी अनहोनी घटना घटित होने से कदापि इनकार नहीं किया जा सकता था। थाना प्रभारी ने दोनों पक्षों को आगामी शनिवार को आयोजित थाना दिवस पर पुनः उपस्थित होकर अपने-अपने अभिलेख,खसरा खतौनी, सीमांकन रिपोर्ट आदि प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।ग्रामीणों के अनुसार इस मामले में पूर्व में आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत संख्या 40020026000033 दर्ज करायी गयी थी।
शिकायत के क्रम में संबंधित लेखपाल द्वारा भूमि की नापी, रेखांकन एवं सीमांकन किया गया, जिसमें मस्जिद की भूमि पर अतिक्रमण पाए जाने का दावा किया गया है।ग्रामीणों का कहना है कि यदि सीमांकन में अतिक्रमण स्पष्ट है, तो प्रशासन को राजस्व प्रक्रिया के तहत तत्काल कब्जा मुक्त कराने की कार्रवाई करनी चाहिए।कानूनी प्रावधान के तहत कई धाराओं में मामला बन सकता है। मामला कई महत्वपूर्ण विधिक प्रावधानों से भी जुड़ा हुआ है। उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006,यदि भूमि राजस्व अभिलेखों में धार्मिक /सार्वजनिक संपत्ति के रूप में दर्ज है, तो उस पर अवैध कब्जा हटाने हेतु धारा 67 के तहत कार्रवाई की जा सकती है।अवैध अतिक्रमण की स्थिति में प्रशासन को नोटिस, सुनवाई और आवश्यक होने पर बेदखली का अधिकार प्राप्त है। वक्फ अधिनियम 1995 नियमावली के तहत यदि संबंधित भूमि वक्फ संपत्ति की श्रेणी में आती है तो बिना वक्फ बोर्ड या सक्षम प्राधिकारी की अनुमति उस पर निर्माण/परिवर्तन अवैध माना जाएगा।
अधिनियम की धारा 52 व अन्य प्रावधान अतिक्रमण हटाने एवं संरक्षण से संबंधित हैं।भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) धार्मिक स्थल से छेड़छाड़,शांति भंग करने, आपराधिक धमकी (धारा 503/506) अथवा अवैध अतिक्रमण से जुड़े मामलों में आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जा सकता है यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो संबंधित प्रधान,पंचायत सचिव अथवा अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों पर विधिक कार्रवाई संभव है। प्रधान और पंचायत सचिव पर सवालिया निशान सवाल खड़ा करता है। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्तमान प्रधान के कार्यकाल में बिना वैधानिक अनुमति रोड़ एवं नाली निर्माण कराया गया। साथ ही यह भी कहा गया कि तकिया में मस्जिद संबंधी कोई विधिवत प्रबंधन कमेटी नहीं है, जिससे भूमि संरक्षण की व्यवस्था कमजोर पड़ी है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि निर्माण कार्य की स्वीकृति, तकनीकी स्वीकृति,बजट आवंटन और स्थल चयन की पूरी जांच कराई जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं सरकारी धन का दुरुपयोग तो नहीं हुआ।ग्रामीणों की प्रमुख मांगें मस्जिद की भूमि पर कथित अवैध कब्जे की निष्पक्ष प्रशासनिक जांच, राजस्व एवं पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में कब्जा मुक्त कराना, अवैध रूप से निर्मित रोड एवं नाली को हटाकर भूमि की पूर्व स्थिति में बहाल करना, दोशियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई, भविष्य में अतिक्रमण रोकने हेतु चारदीवारी निर्माण और सुरक्षा व्यवस्था मुख्य रूप से रहे।मामला अति संवेदनशील बना हुआ है तथा लोगों की प्रशासन पर निगाहें टिकी हुई हैं।
मामला धार्मिक संपत्ति से जुड़े होने के कारण अति संवेदनशील बना हुआ है तथा लोगों की निगाहें शासन-प्रशासन पर टिकीं हुई है।ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते निष्पक्ष और पारदर्शी कार्रवाई नहीं हुई तो कानून- व्यवस्था की स्थिति प्रभावित हो सकती है।फिलहाल प्रशासन ने दोनों पक्षों को थाना दिवस पर साक्ष्य प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।अब यह देखना अहम होगा कि राजस्व अभिलेखों, सीमांकन रिपोर्ट और कानूनी प्रावधानों के आधार पर प्रशासन क्या निर्णय लेता है।



