अनूपपुर। 24 अप्रैल को अनूपपुर रेलवे स्टेशन पर मंडल प्रबंधक राकेश रंजन द्वारा निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान जहां स्टेशन की व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया, वहीं एक महत्वपूर्ण बात चर्चा का विषय बन गई—पत्रकारों से बनाई गई दूरी।
🔴 पत्रकारों से संवाद न होने पर सवाल
स्थानीय पत्रकारों ने आरोप लगाया कि निरीक्षण के दौरान मीडिया से संवाद की कोई खास पहल नहीं की गई। जबकि अनूपपुर के पत्रकार लंबे समय से रेलवे से जुड़ी समस्याओं जैसे प्लेटफॉर्म की अव्यवस्था, ट्रेनों की देरी, यात्री सुविधाओं की कमी और अन्य मुद्दों को लगातार उठाते रहे हैं।
पत्रकारों का कहना है कि वे केवल समस्याएं उजागर ही नहीं करते, बल्कि उनके समाधान की दिशा में भी लगातार प्रयास करते हैं।
⚠️ पारदर्शिता पर उठे सवाल
निरीक्षण के दौरान संवाद की कमी को लेकर यह सवाल उठ रहा है कि क्या जमीनी समस्याओं को सामने लाने की पत्रकारों की भूमिका अब असहजता का कारण बन रही है?
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि यदि निरीक्षण केवल औपचारिकता बनकर रह जाए और जमीनी फीडबैक को नजरअंदाज किया जाए, तो सुधार की प्रक्रिया अधूरी रह जाएगी।
🟡 बेहतर संवाद की जरूरत
स्थानीय मीडिया और नागरिकों का मानना है कि प्रशासन और पत्रकारों के बीच संवाद और मजबूत होना चाहिए। क्योंकि समस्याओं के समाधान के लिए खुला संवाद जरूरी है।



