समाज जागरण दैनिक
विश्व नाथ त्रिपाठी
प्रतापगढ़।केंद्र व राज्य की सरकार स्वच्छ शासन व प्रशासन की चाहे जि तनी कोशिश कर ले लेकिन प्रतापगढ़ के भ्रष्ट अधिकारी व कर्मचारी उसकी मंशा पर पानी फेरने की भरपूर कोशिश कर रहे हैं ।इस समय जनता घूसखोरी से परेशान हैं । जनता का काम पुलिस , लेखपाल ,डाक्टर व शिक्षक से हमेशा पड़ता है ।यदि यह कहें कि एक चारों जनता की रोजमर्रा की आवश्यकता में शुमार हैं तो अतिशयोक्ति नहीं होगी लेकिन इन चारों के कारनामें व जनता के प्रति रूखे व्यवहार की चर्चा की जाय तो हर संवेदनशील व्यक्ति के आंखों में आंसू तो आ ही जाएगा।
अब हम सबसे पहले अन्न की बात करते हैं जिसको सरकार राशन के रूप में गरीबों को निशुल्क उपलब्ध कराने का दावा करती है लेकिन इस नि:शुल्क में भी सेंध लगाने वाले कमीनों की कमी नहीं है योगी जी । यहां बैठा राशन से संबंधित हर व्यक्ति चोर है ।पहला चोर तो सप्लाई आफिस में बैठा है जो कोटेदार से धन ऐंठता है,।इसके बाद आता है निकासी वाला व्यक्ति जिसकी हर बोरी मानक से कम होती है।निकासी द्वार हट कर कोटेदार के पास आती है जहां कोटेदार घटतौली तो करता ही है साथ में यह भी प्रयास करता है कि इसे टरकाते रहो तो पूरा बच जायेगा ।जब यह फ्री का अन्न गरीब के पास पहुंच ता है तब वह उसे बेचने के लिए पड़ोस के दुकानदारों के पास जा कर कम दाम में बेच देता है ।यह हकीकत है सरकार के फ्री अन्न योजना की।
अब आते हैं हम शिक्षा पर जोर खाने के बाद आज आवश्यक है ।गांव की प्राथमिक पाठशालाओं का हजारों का वेतन उठाने वाला शिक्षक न समय से आता है और न पढ़ाता है ।गांव का गरीब मजबूरी में बच्चों को गैर सरकारी विद्यालय में भेजता है जहां उसे कम पढ़े-लिखे लोग पढ़ाते हैं उन्हें वर्तनी तक का ज्ञान नहीं होता ,फीस ,किताब,ड्रेन के नाम पर मनमानी उगाही ,कदम कदम पर पैसा यह कहानी कक्षा पांच तक की है अब मिडिल से इंटर तक भरपूर लूट गैर। सरकारी में है ।सरकारी स्कूल भी पीछे नहीं हैं बच्चों से नम्बर देने के नाम पर ,सेंटर पर नकल कराने व मार्कशीट व रेजल्ट कार्ड, टीसी आदि में वसूली से परेशान ग्रामीण कहां जाय ।शासन,प्रशासन मौन क्योंकि हिस्सेदारी सब की है।
अब उच्च शिक्षा जो रसूखदारों के पास है।खादी को दागदार करने वाले लोगों का कब्जा है । मनमानी वसूली , कहीं मानक का पालन नहीं,एक ही भवन पर विभिन्न मान्यताएं,आखीर इनको कौन रोकेंगे। जिस डकैती भरे काम में खुद शासन के लोग शामिल हो उसको सुधारने का क्या पैमाना है सरकार के पास ।चुनाव के पहले पैदल चलने वाला पाच वर्षों में हवाई जहाज से चलने की हैसियत कहां से आ गयी।जीवनभर नौकरी करने वाला एक सी में चलने की औकात नहीं रख पाता।
यह समाचार किस्सा कुर्सी की पोल खोलता है ।राशन और शिक्षा के साथ ही चिकित्सा विभाग साथ ही चलता है ।सरकारी अस्पताल भी लूट के अड्डे हैं। वहां सभी डाक्टर हाजिर नहीं मिलेंगे। चिकित्साधिकारी पैसा लेता है और उनके आने जाने की छूट रहती है बाघराय सरकारी अस्पताल केएक ऐसे डाक्टर महोदय हैं जो अपने ही हिसाब से केवल आते ही काम भी करते हैं,प्रसूति का से पैसा लेना,उनके देय राशि में कम भुक्तान करना आदि।कभी कभी तो वार्ड व्याय भी दवा लिखते देखा गया है ।
आब लेख पाल और कानून गो कि सुनिए जो अपने अपने क्षेत्र में जनता के उत्पीड़न में सीधी भूमिका निभाते हैं । लेखपाल अपने हल्के में जमीन का राजा है तभी तो उसके पास की,निजी सहायक हैं जो जमीन की नाप तक वे जरीब लिए खड़े रहते हैं।इन निजी सहायकों को पैसा कौन देता लेखपाल नहीं,भू स्वामी देता है।नाप में उलझा कर झगड़े सुलटाने के बजाय बढ़ाता है ।एस डी यम का आदेश उसके लिए कूड़ा है जनाब क्यों कि वह भी तो हिस्सेदार है।बिना पैसे के कोई काम हो नहीं सकता इनकी गुडई भी कम नहीं है चोरी और सीनाजोरी दोनों है पैसा लेने पर भी का न करना इनकी आदत है ।
पुलिस की गुंडई को कौन नहीं जानता वर्दी चढ़ा लेने पर जब होम गार्ड काबू में नहीं रहता तो सिपाही दरोगा कैसे होंगे ।गरीब को न्याय कहां से मिलेगा। ख़बरनवीस यदि खबर लिया है तब उसे भी सीमा में रहने की नसीहत देता है दरोगा,दे क्यों न चोर डकैत से लेकर गांजा भांग वालों तक से उनकी गलबहियां है जनाब ।एक शिकायत लेकर आप पहुचो तो पता चल जाता है कि पुलिस जनता की कितनी मित्र हैं।महेश गंज थाना हमेशा सुर्खियों रहता है।बड़े कांड यहां हुए लेकिन कोई शिकार नहीं फंसा पुलिस ने क्लीन चिट दे रहा दफा कर दिया।इस थाने के खिलाफ रोज शिकायतें छपती हैं जनता परेशान लेकिन आलाअफर चुप्पी साधे बैठे हैं ।
सबसे ज्यादा लूट गांव सभा में है ।पहला कमीशन जिला फिर ब्लाक फिर प्रधान तब नंबर काम का।ग्राम पंचायत अधिकारी तो कहीं कहीं सर्वाधिक मांग करता हुआ दिखता है।इसका सुदृढ़ निदान सरकार के पास न होने से जनता त्राहि-त्राहि कर रही है।ऐसा लगता है कि लूट खसोट के इस धंधे में सरकार हटाने की शाजिस तो नहीं है।
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