कालांवाली 16 जनवरी (सुरेश जोरासिया) पंजाब की भगवंत मान सरकार द्वारा प्रतिष्ठित समाचार पत्र पंजाब केसरी के कार्यालय पर धावा बोलना अत्यंत निंदनीय, शर्मनाक और तानाशाही सोच का खुला प्रदर्शन है। यह घटना स्पष्ट करती है कि पंजाब सरकार आलोचना और सच्चाई से घबरा चुकी है।
लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कही जाने वाली मीडिया पर इस प्रकार का दबाव बनाना सीधे-सीधे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला है। जो सरकार स्वयं को ईमानदारी और पारदर्शिता की प्रतीक बताती थी, वही आज पत्रकारों की आवाज़ कुचलने पर उतारू है। यह न केवल लोकतांत्रिक मूल्यों का अपमान है, बल्कि संविधान की आत्मा के भी खिलाफ है।
यदि सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए अखबारों के दफ्तरों पर धावे बोलने लगे, तो यह साबित करता है कि शासन अहंकार और भय से संचालित हो रहा है। पंजाब की जनता यह सब देख रही है और समय आने पर इसका जवाब भी देगी।
हम इस कायराना कार्रवाई की कड़े शब्दों में भर्त्सना करते हैं और मांग करते हैं कि दोषी अधिकारियों पर तुरंत कार्रवाई की जाए तथा मीडिया संस्थानों की स्वतंत्रता और सुरक्षा की गारंटी दी जाए। अन्यथा यह माना जाएगा कि पंजाब में लोकतंत्र को योजनाबद्ध तरीके से कमजोर किया जा रहा है। लोकतंत्र में सरकारें सवालों से नहीं, जवाबदेही से मजबूत होती हैं।
महेश कुमार आज़ाद
मंडल महामंत्री, भारतीय जनता पार्टी



