13 किलोमीटर लंबे संपर्क मार्ग के निर्माण में अनियमितता का आरोप, ग्रामीणों ने पीडब्ल्यूडी से निष्पक्ष जांच और क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत की मांग की
समाज जागरण/अनिल कुमार अग्रहरी
डाला, सोनभद्र। कोटा ग्राम पंचायत के अंतर्गत बभनमरी से परासपानी तक स्टेट हाईवे को जोड़ने वाले संपर्क मार्ग के निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि लाखों रुपये की लागत से बनाई जा रही सड़क निर्माण के महज दो दिन बाद ही जगह-जगह से उखड़ने लगी है। सड़क की कथित खराब स्थिति को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है। सोमवार को ग्रामीणों ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) और निर्माण कार्य करा रहे ठेकेदार पर निर्माण मानकों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की।
13 किलोमीटर सड़क की गुणवत्ता पर सवाल
ग्रामीणों के अनुसार, बभनमरी से परासपानी तक करीब 13 किलोमीटर लंबे संपर्क मार्ग का निर्माण लोक निर्माण विभाग की ओर से कराया जा रहा है। उनका आरोप है कि सड़क निर्माण में निर्धारित मानकों और गुणवत्ता का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा गया, जिसके कारण नई सड़क कुछ ही दिनों में उखड़ने लगी।
ग्रामीणों ने सड़क निर्माण में तारकोल के उचित छिड़काव, पुरानी पत्थरीली सड़क की आवश्यक खोदाई तथा मोरंग और सोलिंग के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि निर्माण के दौरान तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया गया, तो सड़क अधिक समय तक टिकाऊ नहीं रह पाएगी।
पुराने मार्ग पर ही निर्माण कराने का आरोप
स्थानीय लोगों का आरोप है कि ठेकेदार ने पुराने मार्ग पर ही एक तरफ से टीचिंग करते हुए करीब छह किलोमीटर सड़क का निर्माण करा दिया है। ग्रामीणों ने इस तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा कि सड़क की मजबूती सुनिश्चित करने के लिए निर्माण कार्य की तकनीकी जांच आवश्यक है।
ग्रामीणों ने सरकारी धन के उपयोग को लेकर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि सार्वजनिक धन से बनने वाली सड़क मजबूत और टिकाऊ होनी चाहिए, ताकि क्षेत्र के लोगों को लंबे समय तक आवागमन की सुविधा मिल सके।
ग्रामीणों ने जताई नाराजगी
सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर दिनेश यादव, कांग्रेस जिला कार्यवाहक अध्यक्ष (ओबीसी), रामलखन गोंड, हरदेव गोंड, सागर गोंड, लालबहादुर गोंड, बाबूलाल, लल्लू यादव और विनोद यादव सहित अन्य ग्रामीणों ने नाराजगी जताई।
ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से मौके पर पहुंचकर सड़क का निरीक्षण कराने और निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जहां सड़क उखड़ गई है, वहां आवश्यक सुधार कराया जाए और निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप पूरा किया जाए।
जांच और कार्रवाई का इंतजार
ग्रामीणों की मांग है कि लोक निर्माण विभाग सड़क निर्माण की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराए, ताकि गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर जिम्मेदारी तय की जा सके। साथ ही सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत कराकर मार्ग को टिकाऊ बनाया जाए।
फिलहाल निर्माण में अनियमितता के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। अब देखना होगा कि ग्रामीणों की शिकायत पर विभाग कब जांच कराता है और सड़क की गुणवत्ता सुधारने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
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