असनहर मोड़ से छत्तीसगढ़ सीमा तक 14 किलोमीटर सड़क का काम धीमा, मजदूरों ने ठेकेदार पर लगाया भुगतान में देरी का आरोप
समाज जागरण/सन्तोष कुमार
सोनभद्र। असनहर मोड़ से छत्तीसगढ़ सीमा तक करीब 14 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण कार्य धीमी गति से चलने और मजदूरों की मजदूरी बकाया होने का मामला सामने आया है। करीब 54 करोड़ रुपये की लागत से बन रही इस सड़क पर बिखरी गिट्टियों और उड़ती धूल से राहगीरों, दोपहिया वाहन चालकों तथा स्कूली बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय मजदूरों ने भुगतान नहीं मिलने का आरोप लगाया है, जबकि ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से हस्तक्षेप कर निर्माण कार्य में तेजी लाने की मांग की है।
ग्रामीणों के मुताबिक, सड़क निर्माण का काम जून महीने में शुरू हुआ था और इसे एक वर्ष के भीतर पूरा किया जाना है। हालांकि, पांच से छह महीने बीतने के बाद भी निर्माण की प्रगति को लेकर असंतोष बना हुआ है। मजदूरों का कहना है कि कई दिनों की मजदूरी बकाया होने के कारण उन्होंने काम बंद कर दिया है।
मजदूरी भुगतान नहीं होने से मजदूर परेशान
डुमरहर गांव के अजय, विजय, राम प्रसाद, छोटेलाल और सुभाष चंद्र सहित अन्य मजदूरों ने आरोप लगाया कि मजदूरी का भुगतान मांगने पर ठेकेदार की ओर से आनाकानी की जाती है। मजदूरों का यह भी आरोप है कि स्थानीय श्रमिकों को काम से हटाकर बाहर से मजदूर बुलाए जा रहे हैं।
मजदूरों का कहना है कि सड़क निर्माण में काम करने के बावजूद समय पर भुगतान नहीं मिलने से उनके सामने आर्थिक परेशानी खड़ी हो रही है। उन्होंने बकाया मजदूरी का जल्द भुगतान कराने की मांग की है।
पहले भी हुई थी कार्रवाई, फिर भी काम की गति पर सवाल
सड़क निर्माण में देरी को लेकर करीब एक पखवाड़े पहले जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने नाराजगी जताई थी। इसके बाद चार अवर अभियंताओं का वेतन रोकने और कार्यदायी संस्था पर 20 लाख रुपये का जुर्माना लगाने की कार्रवाई की गई थी।
इसके बावजूद ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य में अपेक्षित तेजी दिखाई नहीं दे रही है। उनका सवाल है कि जब परियोजना पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, तो निर्माण समय पर पूरा कराने और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी निगरानी क्यों नहीं हो रही है।
गिट्टियों और धूल से दुर्घटना का खतरा
निर्माणाधीन सड़क पर बिखरी गिट्टियां और धूल राहगीरों के लिए परेशानी का कारण बन रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि गिट्टियां बिछाने के बाद नियमित रूप से पानी का छिड़काव और पर्याप्त रोलिंग नहीं कराई गई है। इससे वाहनों के गुजरने पर धूल उड़ती है और गिट्टियां छिटकने की आशंका बनी रहती है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, दोपहिया वाहन चालकों के फिसलने और स्कूली बच्चों के चोटिल होने का खतरा बना हुआ है। सोन कुंवर ने सड़क पर नियमित पानी का छिड़काव कराने की मांग की। राम दयाल ने बताया कि राशन लेने जाने में भी परेशानी होती है। हीरा रतन ने निर्माण की धीमी गति पर चिंता जताई, जबकि विनोद ने कहा कि मजदूरी का भुगतान नहीं होने से स्थानीय लोगों को रोजगार का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है।
लोक निर्माण विभाग ने दिया कार्रवाई का भरोसा
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता शिव कुमार सिंह ने कहा कि कार्यदायी संस्था से बात कर मजदूरों की बकाया मजदूरी का भुगतान कराने के निर्देश दिए जाएंगे। साथ ही निर्माण कार्य में तेजी लाकर सड़क को निर्धारित मानकों के अनुरूप पूरा कराने के लिए भी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
अब ग्रामीणों की निगाहें विभागीय कार्रवाई पर टिकी हैं। स्थानीय लोगों की मांग है कि मजदूरों की बकाया मजदूरी का शीघ्र भुगतान कराया जाए, सड़क पर नियमित पानी का छिड़काव हो और निर्माण कार्य को निर्धारित समयसीमा में गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा किया जाए।
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