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भगवद्गीता में जीवन दर्शन विषय पर ऑनलाइन गोष्ठी का हुआ आयोजन*



*भगवद्गीता है सनातन ऋषि परम्परा का महाग्रन्थ-डॉ. रामचन्द्र (कुरुक्षेत्र)*

गाजियाबाद,वीरवार 29 मई 2025,केंद्रीय आर्य युवक परिषद् के तत्त्वावधान में भगवद्गीता में जीवन दर्शन विषय पर ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन किया गया।य़ह कोरोना काल से 715 वाँ वेबीनार था।

वैदिक विद्वान कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के आई आई एचएस के संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. रामचंद्र ने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता भारत की सनातन ऋषि परम्परा का प्रतिनिधि ग्रन्थ है। विश्व में यह पहला ग्रंथ है जिसका उपदेश युद्ध की भूमि में दिया गया है और जिसकी जयंती (मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी) मनाई जाती है। कुल अठारह अध्याय और सात सौ श्लोकों से युक्त इस ग्रन्थ रत्न में गागर में सागर की तरह ज्ञान,दर्शन एवं विचार का महासागर समाया हुआ है।भारतीय मनीषा का यह ऐसा अनुपम ज्ञानकोश है जो सीमाओं से संपूर्ण विश्व के कोटि कोटि जनों की ज्ञान,ध्यान,भक्ति एवं कर्म योग की साधना का पथ प्रशस्त करता है।डॉ. रामचन्द्र ने कहा कि जब विषाद ग्रस्त धनुर्धर योद्धा अर्जुन बाण सहित धनुष का विसर्जन करके रथ की गोद में बैठ जाता है।तब श्रीकृष्ण दूसरे अध्याय में पहली बार अपना मुख मंडल खोलते हैं।गीता में जीवन के उन्नयन के लिए द्वितीय अध्याय में स्थितप्रज्ञ  बनने का कालजयी संदेश दिया गया है।इन उन्नीस श्लोकों के अध्ययन में विश्व की असंख्य समस्याओं का समाधान छिपा हुआ है।गीता का दर्शन है यज्ञ के अनुष्ठान से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।समत्व योग के पालन से तनाव दूर होकर आन्तरिक शान्ति प्राप्त होती है तथा युक्त आहार,विहार,शयन एवं जागरण से जीवन के सभी दु:ख समाप्त हो जाते हैं।मुख्य वक्ता ने 16वें अध्याय के देैवी एवं आसुरी शक्ति के स्वरूप का विस्तृत एवं प्रभावी वर्णन करते हुए आहार,तप,यज्ञ,सुख एवं दान के सात्त्विक,राजस एवं तामस स्वरूप का भी विस्तृत वर्णन किया।उन्होंने कहा कि आज समाज में सभी विषयों में राजस एवं तामस वृत्तियों का व्यवहार बढ़ रहा है और यही संसार के दु:खों का मूल कारण है। यदि भगवद् गीता के जीवन दर्शन के अनुसार व्यक्ति अपने जीवन के प्रत्येक विषय में सात्त्विक भाव को अपनाना प्रारंभ कर दें तो जीवन निश्चल,निश्छल एवं निर्मल हो जाएगा।

मुख्य अतिथि आर्य नेत्री रजनी गर्ग ने गीता को जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया।परिषद अध्यक्ष अनिल आर्य ने कुशल संचालन किया व प्रदेश अध्यक्ष प्रवीण आर्य ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

गायिका प्रवीना ठक्कर, कौशल्या अरोड़ा, जनक अरोड़ा,कमला हंस,  रविन्द्र गुप्ता, सुनीता अरोड़ा, मृदुल अग्रवाल,शोभा बत्रा, संतोष धर आदि के मधुर भजन हुए।


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