
बालाघाट।जबलपुर में भारत तिब्बत सीमा पुलिस की भर्ती हेतु फिजिकल टेस्ट दे रहे युवक की दर्दनाक मौत हो गयी।अभी कुछ दिन पहले आरक्षक भर्ती के लिए दौड़ लगाते दो युवकों की राख ठंडी भी नही हुई थी कि एक और युवक की मौत से विभाग के ऊपर सवालिया निशान लगना लाजिमी है।प्राप्त जानकारी अनुसार गौर चौकी प्रभारी टेकचंद शर्मा ने बताया कि आइटीबीपी में एसएससी द्वारा जीडी भर्ती के लिए पिछले दिनों लिखित एग्जाम हुआ था। उसमें सफल कैंडिडेट का सोमवार से फिजिकल टेस्ट हो रहा है। आइटीबीपी में फिजिकल टेस्ट टफ है। यहां कैंडिडेट को 5 किमी की दौड़ के साथ अन्य गतिविधियों में क्वालिफाइ करना होता है।
जमतरा स्थित आइटीबीपी सेंटर में ये शारीरिक परीक्षा सुबह से कराई जा रही है।21 मई की सुबह 8 बजे 5 किमी की दौड़ के दौरान बालाघाट के आमगांव नवेगांव निवासी दिनेश (21) पुत्र गोरेलाल की तबियत खराब हो गई। दौड़ के दौरान वह तेजी से हांफने लगा। उसे सांस लेने में परेशानी हुई। कैंडिडेट के दौरान आइटीबीपी द्वारा एम्बुलेंस भी लगाया गया है। उसमें तैनात डॉक्टरों ने चैकअप कर उसे प्राथमिक उपचार कर विक्टोरिया रेफर कर दिया।
दिनेश को विक्टोरिया अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां सुबह 11 बजे के लगभग उसने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। वह खून की उलटियां करने लगा था। आइटीबीपी की शारीरिक परीक्षा में यह पहली कैजुअल्टी बताई जा रही है। युवक के घरवालों को इसकी खबर दे दी गई है, वो जबलपुर के लिए निकल गए थे।परिजनों के पहुंचने पर पोस्टमार्टम कराने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
युवक का बीपी हाई हो गया था। आशंका जताई जा रही है कि हार्टफेल होने से उसकी मौत हुई होगी। इससे पहले जबलपुर के छठी बटालियन में आयोजित आरक्षक शारीरिक परीक्षा में भी बालाघाट व सिवनी निवासी दो युवकों की इसी तरह हार्ट-अटैक के बाद मौत हो गई थी। बरेला का एक युवक भाग्यशाली था कि उसकी तबियत खराब हुई, लेकिन वह बच गया।
पुलिस ने तेज गर्मी के चलते जहां शारीरिक परीक्षा दो जून तक स्थगित कर दी है। वहीं आइटीबीपी द्वारा 43 डिग्री के तापमान में शारीरिक परीक्षा कराने पर सवाल उठ रहे हैं। एफएसएल की टीम भी जांच करने पहुंची थी। एफएसएल प्रभारी डॉ. सुनीता तिवारी ने बताया कि युवक को कैजुअल्टी में बेहोशी की हालत में लाया गया था। उसके मुंह से खून निकल रहा था। ईसीजी आदि जब्त करने के निर्देश दिए हैं।इतनी भीषण गर्मी में दौड़ आदि कराना उचित नही है फिजिकल टेस्ट को आगे बढ़ाया जा सकता है जिससे ऐसे हादसों से बचा जा सकता है।
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