सूर्य भगवान को मांग पत्र समर्पित कर जनप्रतिनिधियों क़ो सद्बुद्धि देनें की ,की गई मांग
दैनिक समाज जागरण अविनाश कुमार जिला संवाददाता औरंगाबाद बिहार
प्रदर्शन के पश्चात किंकर नाट्य कला मंच में विशाल धरना । सूर्य भगवान को मांग पत्र समर्पित कर जनप्रतिनिधियों क़ो सद्बुद्धि देनें की ,की गई मांग । उक्त मांग आज जनेश्वर विकास केंद्र के बैनर तले प्रर्दशन एवं धरना के माध्यम से किया गया । सर्व प्रथम महोत्सव पुरुष सिद्धेश्वर विद्यार्थी के नेतृत्व में एक प्रदर्शन सूर्य मंदिर से गोदाम तक तक निकाला गया । इसमें जिले का नाम देव करने का नारा लगातार लगता रहा । तत्पश्चात नाट्य कला मंच देव मे धरना में परिवर्तित हो गया । धरने की अध्यक्षता डा राजेन्द्र प्रसाद ने की जबकि संचालन डा महेंद्र ने किया।
महोत्सव पुरुष सिद्धेश्वर विद्यार्थी नें कहा कि देव एक पौराणिक, ऐतिहासिक और धार्मिक पर्यटक स्थल है । इसकी महिमा देश दुनिया में फैली हुई है। इसके बावजूद इस स्थल का न तो अपेक्षित विकास हुआ है और ना महत्व ही दिया गया है । दुखद पहलू यह है कि इससे भी कम महत्व वाले कई जगहों को महत्व देने हेतु जिलों का नाम उस जगह के नाम रखा गया है।
जैसे रोहतास किले के नाम पर जिले के नाम रोहतास रखा गया है जबकि इसका मुख्यालय सासाराम है। कैमूर पर्वत श्रृंखला के नाम पर जिले का नाम कैमूर रखा गया है जबकि इसका मुख्यालय भभुआ रखा गयाहै । राजा भोज के नाम पर जिले के नाम भोजपुर रखा गया है जब किसका मुख्यालय आरा में है। ऐतिहासिक स्थल वैशाली के नाम पर जिले का नाम वैशाली रखा गया है जबकि इसका मुख्यालय हाजीपुर में है।
इस तरह ऐतिहासिक स्थल नालंदा के नाम पर जिले का नाम नालंदा रखा गया है जब किसका मुख्यालय बिहार शरीफ है । अपने जिले में भी ऐतिहासिक गढ़ कुटुंबा के नाम पर प्रखंड का नाम कुटुम्बा है जबकि इसका मुख्यालय अंबा में है ।इसी आधार पर औरंगाबाद जिला की पहचान और पौराणिक स्थल देव के नाम होना चाहिए था परंतु तत्कालीन जनप्रतिनिधियों के उदासीन रवैया के कारण ऐसा नहीं हो पाया ।
अब जब जागरूक जनता 1992 से औरंगाबाद जिले का नाम देव करने हेतु आंदोलनरत है तो वर्तमान जनप्रतिनिधियों का भी सहयोग नहीं मिल रहा है जिससे आम जन में भारी आक्रोश है । जनेश्वर विकास केन्द्र के अध्यक्ष रामजी सिंह , उमगा महोत्सव के अध्यक्ष संजय सिंह, कोषाध्यक्ष लंदन सिंह, बिहिप नेता सुरेश पाठक , पूर्व हेडमास्टर रामधारी सिंह एकबाल अहमद, अधिवक्ता रामाश्रय पांडे, यशवंत कुमार , कृष्णा दुबे , बलिराम चंद्रवंशी , रवी प्रकाश ने अपने संबोधन में कहा कि यह आंदोलन 1992से चल रहा है । यदि जनप्रतिनिधियों का सहयोग मिलता और उनके द्बारा विधानसभा और लोकसभा में आवाज उठाई जाती तो अबतक जिले का नाम देव हो गया होता । परन्तु वे आज भी इस मांग के प्रति उदासीनता बरत रहे हैं जो दुखद है । अध्यक्षीय भाषण में डा राजेन्द्र प्रसाद ने कहा कि देशवासियों को इस मांग के लिए आगे आना होगा और इस प्राथमिकता के आधार पर जनप्रतिनिधियों के समक्ष उठना होगा तभी यह मांग पुरा हो सकता है ।
धरना के अंत में कार्यक्रम संयोजक दीपक गुप्ता के नेतृत्व में एक मांग पत्र भगवान भाष्कर के समक्ष समर्पित किया गया । उक्त मांग पत्र के माध्यम से भगवान सूर्य से मांग किया गया कि इस मांग पर स्वयं कृपा बनाये रखें तथा जिले के जनप्रतिनिधियों को सद्बुद्धि प्रदान करें कि वे इस मांग को विधानमंडल और लोक सभा में पारित कराकर गृह मंत्रालय भेजनें मे सहयोग प्रदान करें । तभी जिले का नाम देव हो सकेगा । उपरोक्त धरना प्रदर्शन में जनेश्वर विकास केंद्र के अध्यक्ष रामजी सिंह, सचिव सिद्धेश्वर विद्यार्थी, पूर्व अध्यापक रामधारी गुरूजी, डॉ राजेंद्र प्रसाद, दीपक गुप्ता,कृष्णा दुबे,महेंद्र हार्ड,उपेंद्र यादव,बलिराम सिंह चंद्रवंशी,किरण देवी,रत्नेश सिंह,निर्मल सिंह, अनिल सिंह,मदनपुर से आये हुए क्रन्तिकारी सदस्य विजय सिंह,ललन सिंह,संजय सिंह, अभय सिंह,रतन तिवारी, दिलीप सिंह,प्रमोद सिंह, एडवोकेट रामाश्रय पाण्डेय, यशवंत सिंह, रवि रंजन प्रकाश आदि थे ।
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