एक ही योजना को अलग-अलग नाम से दर्शाकर भुगतान लेने का आरोप, शिलापट्ट नहीं मिलने की भी चर्चा; सरपंच की शिकायत पर डीएम के निर्देश से जांच जारी
वीरेंद्र चौहान, समाज जागरण ब्यूरो, किशनगंज।
किशनगंज। टेढ़ागाछ प्रखंड की चिल्हनियां पंचायत में मनरेगा योजनाओं के क्रियान्वयन और सरकारी राशि की निकासी को लेकर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि एक ही कार्य को अलग-अलग नामों से दर्शाकर दोबारा राशि की निकासी की गई। वहीं, जांच के दौरान संबंधित योजनाओं के शिलापट्ट नहीं मिलने की बात भी सामने आई है। इन आरोपों के बाद योजनाओं के क्रियान्वयन, अभिलेखों और सरकारी धन के उपयोग की पारदर्शिता को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए चिल्हनियां पंचायत के सरपंच कैलाश बोसाक ने जिला पदाधिकारी को आवेदन दिया था। इसके बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर मामले की जांच की जा रही है। हालांकि, कथित वित्तीय अनियमितताओं की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने और रिपोर्ट सामने आने के बाद ही हो सकेगी।
एक ही कार्य के लिए दोबारा भुगतान का आरोप
आरोप लगाया गया है कि पंचायत में किसी एक ही कार्य को अलग-अलग नामों से दर्ज कराकर दोबारा भुगतान कराया गया। यदि जांच में ऐसा पाया जाता है, तो यह सरकारी राशि के उपयोग और मनरेगा योजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़ा गंभीर मामला होगा।
इसकी वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए योजनाओं के स्वीकृति आदेश, प्राक्कलन, माप पुस्तिका, मजदूरों की उपस्थिति, भुगतान विवरण और कार्यस्थलों का भौतिक सत्यापन आवश्यक है। संबंधित अभिलेखों का मिलान कर यह पता लगाया जा सकता है कि योजनाओं के नाम अलग होने के बावजूद कहीं कार्य एक ही तो नहीं है और भुगतान निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप हुआ या नहीं।
शिलापट्ट नहीं मिलने की चर्चा से बढ़े सवाल
जांच के दौरान संबंधित योजनाओं के शिलापट्ट नहीं मिलने की बात भी सामने आई है। शिलापट्ट पर सामान्यतः योजना का नाम, लागत और अन्य आवश्यक विवरण दर्ज होते हैं। ऐसे में शिलापट्ट नहीं मिलने की स्थिति में संबंधित अभिलेखों और कार्यस्थलों का सत्यापन और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
जांच अधिकारियों को यह स्पष्ट करना होगा कि स्वीकृत योजनाओं के तहत निर्धारित स्थानों पर काम हुआ या नहीं, निर्माण की वास्तविक स्थिति क्या है और सरकारी राशि का भुगतान किए गए कार्य के अनुरूप किया गया है या नहीं।
रोजगार सेवक और तकनीकी कर्मियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
मामले में रोजगार सेवक रविंद्र कुमार, कनीय अभियंता राहुल कुमार, पीटीए प्रहलाद कुमार और संबंधित जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। फिलहाल किसी की संलिप्तता प्रमाणित नहीं हुई है। ऐसे में जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही किसी की जिम्मेदारी तय की जा सकेगी।
निष्पक्ष जांच के लिए योजनाओं के अभिलेखों, कार्य की माप, भुगतान विवरण और स्थल पर मौजूद वास्तविक स्थिति का मिलान जरूरी है। यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
जांच रिपोर्ट का इंतजार, दोषियों पर कार्रवाई की मांग
सरपंच के आवेदन पर जिलाधिकारी के निर्देश से शुरू हुई जांच के निष्कर्षों का इंतजार है। ग्रामीणों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाए। यदि सरकारी राशि की अनुचित निकासी की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई के साथ नियमानुसार राशि की वसूली भी सुनिश्चित की जाए।
अब निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि मनरेगा योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता हुई है या नहीं और इस मामले में किसकी जिम्मेदारी बनती है।
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