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किशनगंज के पंचायत सरकार भवनों की मशीनों से जांच की मांग, निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल

पटना मुख्यालय से स्वतंत्र जांच दल गठित करने की मांग, नींव से छत तक निर्माण गुणवत्ता और सरकारी खर्च की जांच कराने की अपील

वीरेंद्र चौहान, समाज जागरण ब्यूरो, किशनगंज।

किशनगंज। जिले की सभी पंचायतों में निर्मित और निर्माणाधीन पंचायत सरकार भवनों की गुणवत्ता की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराने की मांग उठी है। सीमांचल सेवा फाउंडेशन के संस्थापक हसीबुर रहमान ने बिहार सरकार से पटना मुख्यालय स्तर पर स्वतंत्र जांच दल गठित कर जिले के सभी पंचायत सरकार भवनों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच केवल कागजी अभिलेखों तक सीमित न रहे, बल्कि आधुनिक मशीनों और तकनीकी परीक्षणों के माध्यम से भवनों की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाए।

यह मांग किशनगंज प्रखंड की पिछला पंचायत के वार्ड संख्या-2 में जलभराव के बीच नींव की ढलाई का वीडियो सामने आने और पिलर के झुकाव की शिकायत के बाद उठी है। इस संबंध में जिला पदाधिकारी को शिकायत भी की गई थी। फाउंडेशन ने जन शिकायत संख्या 211/2026 के माध्यम से जिले के पंचायत सरकार भवनों की तकनीकी और वित्तीय जांच कराने की मांग रखी है।

नींव से छत तक हो तकनीकी परीक्षण

सीमांचल सेवा फाउंडेशन की मांग है कि जांच के दौरान भवनों की नींव, सरिया, पिलर, छत और अन्य संरचनात्मक हिस्सों की विशेषज्ञों से जांच कराई जाए। कंक्रीट की मजबूती का आकलन करने के लिए रिबाउंड हैमर टेस्ट और अल्ट्रासोनिक पल्स वेलोसिटी (यूपीवी) टेस्ट जैसे परीक्षण किए जाएं। जरूरत पड़ने पर कोर कटिंग टेस्ट के माध्यम से भी कंक्रीट की गुणवत्ता की जांच हो।

इसके साथ ही निर्माण सामग्री के नमूनों की प्रयोगशाला में जांच कराई जाए, ताकि निर्धारित मानकों के अनुपालन की स्थिति स्पष्ट हो सके। फाउंडेशन का कहना है कि तकनीकी परीक्षणों से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि भवनों का निर्माण स्वीकृत मानकों के अनुरूप हुआ है या नहीं।

निर्माण कार्यों की निगरानी पर उठे सवाल

जिले में पंचायत सरकार भवनों की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आने के बाद निर्माण कार्यों की निगरानी और तकनीकी निरीक्षण की व्यवस्था पर सवाल उठाए जा रहे हैं। फाउंडेशन का मानना है कि निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए पटना मुख्यालय से स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञों की टीम भेजी जानी चाहिए।

जांच दल को निर्माण स्थलों का निरीक्षण कर तकनीकी परीक्षणों के परिणामों के आधार पर रिपोर्ट तैयार करनी चाहिए। साथ ही स्वीकृत प्राक्कलन, मापी पुस्तिका, निर्माण की वास्तविक स्थिति और भुगतान संबंधी अभिलेखों का मिलान भी किया जाना चाहिए, ताकि किसी संभावित अनियमितता की पहचान की जा सके।

सभी पंचायत सरकार भवन जांच के दायरे में लाने की मांग

हसीबुर रहमान ने मांग की कि जिले के किसी भी पंचायत सरकार भवन को जांच के दायरे से बाहर नहीं रखा जाए। चाहे भवन का निर्माण पूरा हो चुका हो या काम अभी जारी हो, सभी भवनों की गुणवत्ता और संबंधित वित्तीय अभिलेखों की जांच होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि जांच में यदि निर्माण संबंधी गड़बड़ी या वित्तीय अनियमितता की पुष्टि होती है, तो संबंधित संवेदक, निर्माण एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। इसके अलावा जांच रिपोर्ट और कार्रवाई का विवरण सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि सरकारी धन के उपयोग में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।

जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की अपील

फाउंडेशन ने बिहार सरकार और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से मांग की है कि पंचायत सरकार भवनों की जांच के लिए समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की जाए। तकनीकी परीक्षणों के साथ वित्तीय अभिलेखों की भी पड़ताल हो और निष्कर्षों के आधार पर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएं।

फिलहाल जिले के सभी पंचायत सरकार भवनों में निर्माण संबंधी अनियमितताओं की पुष्टि होना बाकी है। ऐसे में स्वतंत्र तकनीकी जांच और संबंधित विभागों का आधिकारिक पक्ष सामने आने से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।


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