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विद्यालय की अवधि में कोचिंग और ट्यूशन का संचालन: बच्चों का भविष्य खतरे में

दैनिक समाज जागरण अनील कुमार संवाददाता नबीनगर (औरंगाबाद)
नबीनगर (बिहार) नबीनगर प्रखंड के नगर पंचायत क्षेत्र सहित विभिन्न इलाकों में विद्यालय की अवधि में कोचिंग और ट्यूशन का संचालन धड़ल्ले से किया जा रहा है, जिससे बच्चों का भविष्य खतरे में पड़ रहा है। यह समस्या न केवल छात्रों के लिए बल्कि शिक्षा व्यवस्था के लिए भी एक बड़ा चुनौती है। शिक्षा विभाग द्वारा विद्यालय में शिक्षण कार्य की अवधि सुबह साढ़े नौ बजे से शाम चार बजे तक निर्धारित है, लेकिन अधिकांश विद्यालयों में छात्रों की उपस्थिति कम पाई जाती है। इसका एक बड़ा कारण है विद्यालय के समय पर निजी कोचिंग और ट्यूशन संस्थाओं का संचालन। छात्र और अभिभावक कहते हैं कि सरकारी विद्यालयों में पढ़ाई-लिखाई नहीं होती है, इसलिए वे कोचिंग और ट्यूशन का सहारा लेते हैं।जबकि निजी विद्यालय और कोचीन संस्थानों में अपेक्षाकृत अप्रशिक्षित और कम योग्यता वाले शिक्षक होते हैं।सरकारी विद्यालयों में योग्य और प्रशिक्षित शिक्षक मौजूद हैं, लेकिन समस्या है छात्रों की उपस्थिति की। शिक्षक कहते हैं कि छात्र विद्यालय नहीं आते तो किसे पढ़ाएं।सरकारी विद्यालयों में छात्रों को छात्रवृति,पोशाक राशि,सायकिल की राशि और मध्याह्न भोजन भी मिलता है।वही इन सरकारी सहायता के लिए अभिभावक और छात्रों द्वारा विद्यालय को अनावश्यक दबाव झेलना पड़ता है तो दूसरी ओर विभागीय जवाबदेही को लेकर विद्यालय द्वारा भी छात्रों की उपस्थिति बनानी पड़ती है।आखिर इस समस्या का समाधान क्या है? सबसे पहले, सरकार को विद्यालयों में छात्रों की उपस्थिति बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास करने होंगे। इसके लिए सरकार को विद्यालयों में पढ़ाई-लिखाई की गुणवत्ता में सुधार करना होगा। साथ ही, कोचिंग और ट्यूशन संस्थाओं पर भी नजर रखनी होगी और उनके संचालन को नियंत्रित करना होगा।अभिभावकों को भी अपने बच्चों की शिक्षा के प्रति जागरूक रहना होगा और उन्हें विद्यालय में पढ़ाई-लिखाई पर ध्यान देने के लिए प्रेरित करना होगा।


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