google-site-verification: google2b21991adbe5cec3.html

केल्हौरी पंचायत में भ्रष्टाचार का खेल? उपसरपंच ने सरपंच-इंजीनियर पर लगाया लाखों की सरकारी राशि हड़पने का आरोप

घटिया निर्माण, उखड़ चुकी सड़कें और नियमों की खुली अनदेखी; जांच व निर्माण कार्य पर तत्काल रोक की मांग
अनूपपुर/जैतहरी। जनपद पंचायत जैतहरी अंतर्गत ग्राम पंचायत केल्हौरी में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन के दुरुपयोग और निर्माण कार्यों में भारी अनियमितताओं के गंभीर आरोप सामने आए हैं। ग्राम पंचायत के उपसरपंच रामकृष्ण सोनी ने जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को लिखित शिकायत सौंपकर सरपंच एवं संबंधित इंजीनियर पर मिलीभगत से घटिया निर्माण कार्य कर शासन की राशि का बंदरबांट करने का आरोप लगाया है।

शिकायत में कहा गया है कि ग्राम पंचायत में पिछले एक वर्ष के दौरान कराए गए निर्माण कार्य गुणवत्ता विहीन रहे हैं। आरोप है कि लगभग 25 लाख रुपये की लागत से निर्मित तीन पीसीसी सड़कें निर्माण के कुछ ही समय बाद उखड़ने लगी हैं, जिससे निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उपसरपंच का कहना है कि कार्यों की निगरानी के लिए जिम्मेदार इंजीनियर को कई बार अवगत कराया गया, लेकिन न तो कोई सुधारात्मक कार्रवाई हुई और न ही शिकायतों को गंभीरता से लिया गया।

50 लाख के निर्माण कार्यों पर उठे सवाल
शिकायत के अनुसार वर्तमान में ग्राम केल्हौरी में लगभग 50 लाख रुपये की लागत से मंदिर परिसर में बाउंड्री वॉल, मंगल भवन एवं 14 लाख रुपये की उद्यान वाटिका का निर्माण कराया जा रहा है। उपसरपंच ने आरोप लगाया है कि ग्राम में आज भी कई मूलभूत सुविधाओं का अभाव है, लेकिन आवश्यक कार्यों को छोड़कर ऐसे निर्माण कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है जिनसे कुछ लोगों को निजी लाभ पहुंच सकता है।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब ग्राम में पीडीएस भवन जैसी बुनियादी आवश्यकता आज तक पूरी नहीं हुई, तब उद्यान वाटिका पर लाखों रुपये खर्च करने की क्या आवश्यकता थी?

निर्माण में मानकों की अनदेखी का आरोप
शिकायत में निर्माण कार्यों में तकनीकी मानकों की खुलेआम अनदेखी किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। उपसरपंच के अनुसार बाउंड्री वॉल और मंगल भवन के निर्माण में कॉलम की कंक्रीट मोटाई निर्धारित मानक से कम रखी गई है, सरिया की मात्रा घटाई गई है, मिक्सर मशीन का उपयोग नहीं किया जा रहा, शटरिंग के स्थान पर ईंटों का इस्तेमाल किया गया है तथा कंक्रीट को मजबूत बनाने के लिए वाइब्रेटर का उपयोग भी नहीं किया गया।

आरोप है कि निर्माण कार्यों में आधे से भी कम सामग्री का उपयोग कर पूरा मूल्यांकन कराने की तैयारी की जा रही है, जिससे सरकारी धन का बड़ा हिस्सा गलत तरीके से निकाला जा सके।

ड्राइंग और स्वीकृति आदेश देने से भी इंकार
उपसरपंच ने शिकायत में यह भी उल्लेख किया है कि उन्होंने निर्माण कार्यों की ड्राइंग, स्वीकृति आदेश तथा सरिया की बीबीएस (बार बेंडिंग शेड्यूल) की प्रतियां मांगी थीं, लेकिन सरपंच और इंजीनियर ने जानकारी देने से इंकार कर दिया। आरोप है कि शिकायत करने पर उन्हें जवाब दिया गया कि “जहां शिकायत करना है कर दो, काम इसी तरह होगा।”

जनता के हितों की अनदेखी, जांच की मांग
उपसरपंच ने आरोप लगाया है कि पंचायत में विकास कार्यों का चयन ग्रामीणों की जरूरतों के आधार पर नहीं बल्कि व्यक्तिगत हितों को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। उन्होंने सरपंच और संबंधित इंजीनियर के खिलाफ निष्पक्ष तकनीकी जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
अब बड़ा सवाल यह है कि यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही हैं तो ग्राम विकास के नाम पर खर्च हो रही लाखों रुपये की राशि आखिर किसकी जेब भर रही है? क्या जिम्मेदार अधिकारी इन गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करेंगे, या फिर सरकारी धन के दुरुपयोग का यह सिलसिला यूं ही चलता रहेगा?
फिलहाल पूरे मामले की सत्यता जांच का विषय है, लेकिन शिकायत ने पंचायत में चल रहे विकास कार्यों की पारदर्शिता और गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न जरूर खड़े कर दिए हैं।


Discover more from समाज जागरण

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

🛍️ Today’s Best Deals

(Advertisement)