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दो नगर परिषदों की लापरवाही का शिकार इंदिरानगर, नाली निर्माण न होने से नागरिक परेशान

बरसात में घरों में प्रवेश करता है बरसाती पानी

अनूपपुर। विकास के बड़े-बड़े दावे करने वाली नगर परिषदों की हकीकत इंदिरानगर की बदहाल तस्वीर बयां कर रही है। बकहो नगर परिषद अंतर्गत वार्ड क्रमांक 15 तथा सड़क के दूसरी ओर बरगवां नगर परिषद के वार्ड क्रमांक 4 में स्थित इंदिरानगर आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा है। सबसे बड़ी समस्या नाली निर्माण की है, जिसके अभाव में स्थानीय रहवासियों का जीवन नारकीय बन गया है।

क्षेत्र के नागरिकों का आरोप है कि इंदिरानगर दो नगर परिषदों की सीमा के बीच फंसा हुआ है, जिसके कारण दोनों ही निकाय जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं। नतीजा यह है कि वर्षों से नाली निर्माण का कार्य नहीं हो पाया और बरसात शुरू होते ही पूरा क्षेत्र जलभराव की चपेट में आ जाता है।

स्थिति इतनी गंभीर है कि हल्की बारिश में ही सड़कों और गलियों में घुटनों तक पानी भर जाता है। गंदा पानी लोगों के घरों में घुस रहा है, जिससे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जलभराव के कारण संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की नींद अब तक नहीं टूटी है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार जनप्रतिनिधियों और नगर परिषद के अधिकारियों को समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिले। जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। रहवासियों का आरोप है कि चुनाव के समय वोट मांगने वाले जनप्रतिनिधि अब क्षेत्र की समस्याओं से आंखें मूंदे हुए हैं।

इंदिरानगर के नागरिकों ने मांग की है कि दोनों नगर परिषदें आपसी जिम्मेदारी तय कर तत्काल नाली निर्माण कराएं, ताकि वर्षों से चली आ रही इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान हो सके। यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो क्षेत्रवासी आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर इंदिरानगर के नागरिक किसके भरोसे रहें? जब दो-दो नगर परिषदों की सीमा में रहने के बावजूद लोगों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं, तो विकास के दावों का क्या औचित्य रह जाता है?


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