समाज जागरण रंजीत तिवारी
वाराणसी। माघ मास के पावन स्नान अवसर पर काशी के गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की अपार भीड़ उमड़ पड़ी। तड़के भोर से ही लाखों श्रद्धालु मां गंगा में आस्था की डुबकी लगाने के लिए घाटों पर पहुंचने लगे। “हर-हर गंगे” और “बम-बम भोले” के जयघोष से पूरे घाट क्षेत्र का वातावरण भक्तिमय और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण हो गया।
गंगा घाट के तीर्थ पुरोहित अजय तिवारी ने बताया कि माघ मास का यह विशेष स्नान 14 जनवरी के पर्व के रूप में जाना जाता है। इस दिन काशीवासी ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों से आए श्रद्धालु गंगा स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित करते हैं और अपने जीवन की नई शुरुआत के लिए मां गंगा का आशीर्वाद लेते हैं। उन्होंने बताया कि इसी दिन से पतंगबाजी की परंपरा भी प्रारंभ मानी जाती है, जो काशी की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है। ज्योतिषाचार्य डॉ शीतला प्रसाद त्रिपाठी ने यह भी बताया कि इस वर्ष एकादशी तिथि के संयोग के कारण स्नान पर्व का महत्व अपेक्षाकृत कुछ कम माना गया है, अन्यथा यह दिन मकर संक्रांति के रूप में बड़े उत्सव और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।
मकर संक्रांति पर काशी की महिलाएं गंगा स्नान के उपरांत ब्राह्मणों को श्रद्धा से बनाए गए व्यंजन और दान-दक्षिणा अर्पित करती हैं तथा परिवार की सुख-समृद्धि, यश और कीर्ति की कामना करती हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान करने से पुण्य, वैभव और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस पूरी तरह सतर्क नजर आई। गंगा घाटों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। पर्याप्त संख्या में पुलिस बल, महिला पुलिस कर्मियों की तैनाती के साथ ही ड्रोन कैमरों से निगरानी की गई, ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगम व्यवस्था मिल सके।
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