
समाज जागरण
वाराणसी/चन्दौली एनओडीएस के राष्ट्रीय महासचिव डॉ प्रकाश कुमार पांडेेय ने यूथलीग द्वारा दिल्ली में आयोजित कन्वेंशन में संगठन का प्रतिनिधित्व किया और अपने वक्तव्य में कहा कि हमारे देश में प्रोफेशनल एजुकेशन प्राप्त करने वाले लोगों में बेरोजगारी की समस्या दिनोंदिन बढ़ती जा रही है चाहे वह डेंटल सर्जन की बात हो, फिजियोथेरेपिस्ट की बात हो ,इंजीनियर की बात हो या एमबीए करने वाले छात्रों की बात हो। डॉ प्रकाश ने कहा कि संगठन द्वारा 16 दिसंबर 2021 को दिल्ली में जंतर मंतर पर प्रोटेस्ट का आयोजन किया गया था जिसमें देश कके 16 संगठन ने सहयोग दिया था उस कार्यक्रम में चेन्नई से आए एक 75 वर्षीय पूर्व प्रोफेसर ने कहा कि तमिलनाडु में दंत चिकित्सकों की हालत बहुत खराब हो गई है और वह विदेश में जाकर नर्सिंग असिस्टेंट का कार्य कर रहे हैं और तमिलनाडु में ऑनलाइन फूड डिलीवरी का काम कर रहे हैं डॉ पांडेय ने आगे कहा कि वह देश के विभिन्न राज्यों में भ्रमण करते हैं अभी हाल ही में उन्हें यह पता चला कि पंजाब में डेंटल सर्जन डिग्री प्राप्त करके कनाडा में जाते हैं और वहां ड्राइविंग का कार्य करके अपना जीवन यापन कर रहे हैं,यह देश का कितना बड़ा दुर्भाग्य है कि देश में प्रोफेशनल डिग्री होल्डर कि यह दुर्दशा हो गई है तो देश में मजदूर, किसान, बीए, बीएससी करने वालों की हालत का अंदाजा हम लोग अपने आप ही लगा सकते हैं, एक तरफ तो सरकार जीडीपी – जीडीपी करती है लेकिन दूसरी तरफ देश में प्रोफेशनल डिग्री होल्डर की दयनीय स्थिति हो गई है। हमारे देश में विगत वर्ष 10 लाख से ज्यादा कैंसर के मरीज रिपोर्ट किए गए जिसमें लगभग आधे के लगभग मुंह के कैंसर से संबंधित केस थे, लेकिन सरकारों ने प्राथमिक स्तर पर ओरल कैंसर की डायग्नोसिस करने के लिए दंत चिकित्सकों की नियुक्ति हेल्थ और वैलनेस सेंटर पर नहीं की है और बहुतायत राज्यों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी दंंत चिकित्सकों के पद सृजित नहीं है।
अंत में उन्होंने कहा कि संगठन द्वारा पूरे देश में ओरल हेल्थ एवं इंप्लायमेंट मिशन चलाया रहा है जिसके अंतर्गत देश के 200 जिलों में संगठन द्वारा कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा हैं और हस्ताक्षर अभियान भी चलाया जा रहा है,हमारे देश में आयुष्मान भारत और विभिन्न राज्यों द्वारा पोषित चिकित्सा प्रतिपूर्ति योजनाओं के अंतर्गत ज्यादातर डेंटल ट्रीटमेंट सम्मिलित नहीं किए जाते हैं क्योंकि इन योजना में आईपीडी होने पर ही मतलब जब तक मरीज एडमिट नहीं होगा उसके इलाज की प्रतिपूर्ति नहीं होगी और मुंह एवं दांतों की बीमारियों में बहुतायत ओपीडी ही होती है मरीज को केवल ट्रॉमा या कुछ विशेष परिस्थितियों में ही एडमिट किया जाता है जबकि हमारे देश में ऐसा कोई परिवार नहीं होगा जिसके किसी भी सदस्य के दांतों में कैविटी ना हो,मसूड़े में गंदगी ना हो लेकिन सरकार ध्यान नहीं दे रही है और हम लोगों की यह लड़ाई देश के उन 80 करोड लोगों के ओरल हेल्थ की लड़ाई है जो 5 किलो अनाज पर निर्भर है।
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