टाइगर रिजर्व में रेस्क्यू किए गए नर हाथी की मृत्यु, रेस्क्यू के बाद दो माह से चल रहा था इलाजउमरिया

संजय टाइगर रिजर्व क्षेत्र में दो जंगली हाथियों के हमले से दो महीने पहले 19 मई को तीन नागरिकों की दर्दनाक मृत्यु हो गई थी।इस घटना में शामिल एक नर हाथी को दो दिन बाद 21 मई 2025 को विभागीय हाथियों की सहायता से बेहोश कर रेस्क्यू किया गया था,इसी हाथी की इलाज के दौरान मौत हो गई है।आपको बता दे रेस्क्यू के दौरान हाथी को एक प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जिसमें विभागीय हाथियों से घेरना, निस्तेज करना तथा ट्रक में लंबा परिवहन शामिल होता है। यह हाथी रेस्क्यू की प्रक्रिया में बीमार हुआ तथा रेस्क्यू के बाद से ही हाथी का इलाज प्रारंभ हुआ,हालांकि चंद दिनों के इलाज के बाद रामा हाथी कैम्प में उक्त हाथी अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में होने लगा था हालांकि उसे विशेष चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया। बीते दो माह से उसका इलाज सतत रूप से बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के वन्यप्राणी चिकित्सक द्वारा किया जा रहा था। इसके अतिरिक्त संजय टाइगर रिजर्व, मुकुंदपुर ज़ू और जबलपुर स्थित स्कूल ऑफ वाइल्डलाइफ फॉरेंसिक्स एंड हेल्थ के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम भी निरंतर परीक्षण व उपचार में संलग्न रही।दुर्भाग्यवश मंगलवार की सुबह उक्त नर हाथी ने अंतिम सांस ली। इस वन्य जीवन योद्धा की मृत्यु ने न केवल वन विभाग बल्कि समस्त वन्यप्रेमियों को शोकसंतप्त कर दिया है।मृत हाथी का शव विच्छेदन (पोस्टमार्टम) विशेषज्ञों की उपस्थिति में किया जा रहा है,फील्ड डायरेक्टर डॉ अनुपम सहाय ने बताया कि प्रबन्धन इस घटना को अत्यंत संवेदनशीलता और गंभीरता से लेते हुए हर एक पहलू की समीक्षा कर रहा है।जिससे मृत्यु के वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सके।

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