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पटना में संदिग्ध परिस्थिति में महिला की मौत

समाज जागरण पटना जिला संवाददाता:- वेद प्रकाश

पटना/ जिले के बाढ़ अनुमंडल अंतर्गत उमानाथ क्षेत्र में एक महिला की संदिग्ध स्थिति में मौत से सनसनी फैल गई है। मृतका की पहचान रूपा देवी के रूप में हुई है, जो गोसाईंमठ मोहल्ला में रहती थीं। वह मूल रूप से नालंदा जिले के जगतपुर गांव की रहने वाली थीं। मामले में मृतका के पति को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है और जांच शुरू कर दी गई है। परिजनों के अनुसार, रूपा देवी का शव घर के अंदर बेड पर पड़ा हुआ मिला। कमरे में न तो रस्सी मिली और न ही फांसी लगाने जैसा कोई सबूत मौजूद था। इससे परिजनों ने आशंका जताई है कि रूपा देवी की हत्या गला दबाकर की गई है। उनका आरोप है कि हत्या के बाद पूरे परिवार के लोग शादी समारोह में चले गए और मृतका के मायके वालों को सूचना तक नहीं दी गई। रूपा देवी के परिजनों का कहना है कि उनका पति धनराज कुमार शराब का अवैध कारोबार करता था और लंबे समय से रूपा के साथ मारपीट करता आ रहा था। उन्होंने बताया कि रूपा ने कई बार अपनी पीड़ा परिवार के सामने साझा की थी। कुछ दिन पहले भी पति द्वारा जान से मारने की धमकी दी गई थी। हालांकि परिवार ने उसे समझा-बुझाकर ससुराल में रहने की सलाह दी थी, ताकि बच्चों की परवरिश प्रभावित न हो। रूपा देवी और धनराज कुमार के तीन बच्चे हैं। यह दुखद घटना बच्चों के सामने एक त्रासदी के रूप में सामने आई है। परिवार अब बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित है। परिजन न्याय की मांग कर रहे हैं और चाहते हैं कि दोषी को सख्त सजा मिले। मृतका के पति धनराज कुमार ने अपनी सफाई में कहा है कि वह घटना के समय पास के मंदिर में था और तीन दिनों से पत्नी से बातचीत नहीं कर रहा था। उसने यह भी कहा कि रूपा ने खाना भी नहीं खाया था। वहीं पुलिस ने शुरुआती जांच में बताया कि पड़ोसियों ने पति-पत्नी के बीच पिछले तीन दिनों से विवाद की जानकारी दी है।
घटना की जानकारी मिलते ही सब इंस्पेक्टर रविरंजन सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घर की तलाशी ली। पति को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी गई है। फॉरेंसिक टीम को भी बुलाया गया है ताकि घटनास्थल की वैज्ञानिक जांच हो सके। शव को पोस्टमार्टम के लिए अनुमंडलीय अस्पताल भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के असली कारण का पता चल पाएगा। यह घटना समाज के उस कड़वे सच को उजागर करती है, जहां घरेलू हिंसा अब भी महिलाओं की जिंदगी को प्रभावित कर रही है। यदि परिजनों के आरोप सही साबित होते हैं, तो यह एक सोची-समझी हत्या का मामला बन सकता है। अब पूरा मामला पुलिस जांच पर निर्भर है, जो आगे की कार्रवाई की दिशा तय करेगा।


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