दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी में बढ़ते प्रदूषण के खतरनाक स्तर पर सर गंगा राम अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. धीरेंद्र गुप्ता ने चेतावनी जारी की है। उन्होंने कहा है कि बच्चों के अंग नाजुक होते हैं और वायु प्रदूषण से इन अंगों पर पड़ने वाला प्रभाव अधिक हानिकारक होता है।

वायु प्रदूषण का बच्चों पर गंभीर असर:
- अस्थमा और सांस की समस्या: डॉ. गुप्ता के अनुसार, प्रदूषण अस्थमा और सांस संबंधी अन्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए विशेष रूप से हानिकारक है।
- प्रदूषण-जनित अस्थमा: उन्होंने बताया कि अगर कोई स्वस्थ व्यक्ति भी अत्यधिक प्रदूषित हवा में सांस लेता है, तो उसके फेफड़ों में ऐसे बदलाव हो सकते हैं, जिससे उसे प्रदूषण-प्रेरित अस्थमा हो सकता है।
- गर्भवती महिलाएं और बच्चे: डॉ. गुप्ता ने यह भी कहा कि प्रदूषण का असर सिर्फ गर्भवती महिलाओं पर ही नहीं, बल्कि उनके होने वाले बच्चों पर भी पड़ता है।
वाहन प्रदूषण सबसे बड़ी समस्या:
- मुख्य कारण: डॉ. गुप्ता ने कहा कि प्रदूषण की सबसे बड़ी समस्या वाहन प्रदूषण है।
- प्रशासन से अपील: उन्होंने सरकार से अनुरोध किया है कि प्रदूषण के रोके जा सकने वाले कारणों पर नियंत्रण किया जाए।
- अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ी: डॉ. गुप्ता ने अक्टूबर 2024 में बताया था कि प्रदूषण बढ़ने के कारण अस्पताल में बच्चों के मरीजों की संख्या तीन गुना बढ़ गई है, जिनमें ज्यादातर नवजात बच्चे और अस्थमा के मरीज शामिल हैं।
प्रदूषण से बचाव के उपाय:
- मास्क का उपयोग: डॉ. गुप्ता के अनुसार, बच्चों को प्रदूषण से बचाने के लिए एन95 मास्क पहनाना चाहिए।
- आउटडोर गतिविधियों से बचें: खासकर सुबह और शाम के समय बच्चों को बाहर की गतिविधियों से बचना चाहिए, जब प्रदूषण का स्तर सबसे ज्यादा होता है।
- इंडोर हवा की गुणवत्ता: घर में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल और वेंटिलेशन का ध्यान रखना भी जरूरी है।
निष्कर्ष:
डॉ. धीरेंद्र गुप्ता ने आगाह किया है कि अगर समय रहते प्रदूषण पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो बच्चों और गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य पर इसके गंभीर और दीर्घकालिक परिणाम हो सकते हैं। इस समस्या से निपटने के लिए सरकारी नीतियों और नागरिकों के सहयोग की आवश्यकता है।
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