आदिवासी सुनील त्रिपाठी/ समाज जागरण
ओबरा/ सोनभद्र। श्री राम नगर स्थित ॐ श्री सदाशिव महादेव मंदिर प्रांगण में चल रहे श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ महोत्सव के छठवें दिन शनिवार को भक्ति की अविरल धारा बही। कथा व्यास माधवाचार्य पं. महेशदेव पांडेय जी ने भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के विवाह का ऐसा सजीव और भावपूर्ण चित्रण किया कि पूरा पांडाल “राधे-राधे” और “जय श्री कृष्ण” के जयकारों से गूंज उठा।
कथा का रसपान कराते हुए व्यास जी ने कहा कि रुक्मिणी जी साक्षात लक्ष्मी स्वरूपा हैं और भगवान श्रीकृष्ण नारायण हैं। जीवात्मा का परमात्मा से मिलन ही इस विवाह का मूल उद्देश्य है। उन्होंने महारास, मथुरा गमन और तत्पश्चात रुक्मिणी हरण के प्रसंग को विस्तार से सुनाया। व्यास जी ने समझाया कि जब भक्त भगवान को सच्चे हृदय से पुकारता है, तो भगवान सभी बाधाओं को पार कर उसे अपने शरण में ले लेते हैं। रुक्मिणी जी द्वारा भगवान को लिखे गए सात श्लोकों के प्रेम पत्र का वर्णन सुनकर श्रोता भावुक हो गए।
कथा के दौरान जैसे ही रुक्मिणी-कृष्ण विवाह का प्रसंग आया, पूरा माहौल उत्सव में बदल गया। विवाह की सजीव झांकी सजाई गई। मुख्य यजमान पं. प्रमोद चौबे और उनकी धर्मपत्नी ने कन्यादान की रस्म पूरी की और द्वारकाधीश की पूजा-अर्चना की।
इस मौके पर महिला श्रद्धालुओं ने मंगल गीत गाए और फूलों की वर्षा की। ढोल-नगाड़ों की थाप पर भक्त झूमते नजर आए। अंत में व्यास जी ने बताया कि कल कथा का विश्राम दिवस होगा जिसमें सुदामा चरित्र का वर्णन किया जाएगा। आरती और प्रसाद वितरण के साथ छठवें दिन की कथा पूर्ण हुई। वहीं प्रात: कालीन बेला में ॐ श्री सदाशिव परिवार और श्री राधा रानी ने ओबरा नगर के भ्रमण में श्री गीता मंदिर, श्री माता शीतला मंदिर, श्री हनुमान मंदिर, श्री राम जानकी मंदिर, श्री शिव मंदिर, श्री गायत्री मंदिर, श्री करुणेश्वर मंदिर से होते हुए ॐ श्री सदाशिव महादेव मंदिर पहुंचे। नगर भ्रमण में भगवान ने सभी श्रद्धालुओं को दर्शन दिया। रास्ते भर में माताओं ने भक्ति भाव में नृत्य करती रहीं।
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