समाज जागरण ब्यूरो विवेक देशमुख
टिकरापारा। ब्रह्मा कुमारीज टिकरापारा सेवाकेन्द्र के हारमनी हॉल में चल रहे योग प्रशिक्षण के 13वें दिन योगाभ्यास कराते हुए मंजू दीदी ने कहा कि सही विधि से किए गए कार्य से ही सफलता मिलती है। प्राणायाम का अभ्यास भी सही तरीके से सीखकर जब हम करेंगे तब ही हमें लाभ प्राप्त होगा। प्रातःकाल हवादार कमरे में खाली पेट योग अभ्यास करना चाहिए। केवल भस्रिका, अनुलोम-विलोम, भ्रामरी व उद्गीथ प्राणायाम व वज्रासन का अभ्यास भोजन के बाद किया जा सकता है बाकी आसन-प्राणायामों के लिए भोजन के बाद 4 से 5 घण्टे का समयांतराल होना चाहिए। ध्यानमुद्रा में बैठकर प्राणायाम करने से एकाग्रता बढ़ती है और रीढ़ सीधी रखने से हमारे फेफड़े फैलते हैं जिससे सांस लेने में आसानी होती है और हम ज्यादा ऑक्सीजन ले पाते हैं। यह शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य पर बहुत अच्छा प्रभाव डालता है। यदि आप सीटिंग जॉब में हैं या पढ़ाई करते हैं तो सीधे बैठकर कार्य करने या पढ़ने से नींद भी कम आती है और हमारा व्यक्तित्व भी अच्छा दिखता है। इसके विपरीत गलत तरीके से बैठने पर पीठ दर्द की समस्या भी आ सकती है।

धीरे-2 बढ़ाएं अभ्यास, सावधानियों का रखें ध्यान, भ्रमित न हों.
किसी भी आसन या प्राणायाम का अभ्यास करते समय ध्यान रहे कि शुरूआत में जल्दी-जल्दी, ज्यादा आवृति में या सहन क्षमता से अधिक स्ट्रेच न करें अन्यथा मांसपेशियों में खींचाव आने से दर्द आरंभ हो जाएगा। जब आप नियमित अभ्यास करते जाएंगे तो धीरे-धीरे आपकी मांसपेशियों में लचीलापन आ जाएगा और आप सही स्थिति तक पहुंच जायेंगे। इस बात में भ्रमित न हों कि कहीं पर वही योग एक तरीके से सिखाया जाता तो कहीं दूसरी विधि से। ऐसा इसलिए है कि हमारे योग गुरूओं ने ही एक आसन या प्राणायाम की दो-तीन अलग-अलग विधियां सिखाई हैं जो कि उनके अनुसार सही ही हैं।
साथ ही कुछ अभ्यासों में विशेष सावधानियां होती हैं जैसे हृदयरोग, हर्निया, कमर दर्द आदि के लिए कुछ सावधानियां होती हैं। जिनका उन्हें पूर्णतः पालन करना ही चाहिए।
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