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डीआरडीए जांच में मनरेगा अनियमितताओं की पुष्टि, कार्रवाई की अनुशंसा के बाद भी एफआईआर नहीं; उठने लगे सवाल

वीरेंद्र चौहान, समाज जागरण ब्यूरो किशनगंज।
30 जुलाई।
दिघलबैंक प्रखंड की ग्राम पंचायत दिघलबैंक में मनरेगा योजनाओं के क्रियान्वयन में कथित अनियमितताओं को लेकर जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (डीआरडीए), किशनगंज की जांच रिपोर्ट में कई गंभीर तथ्य सामने आए हैं। जांच प्रतिवेदन में पंचायत प्रतिनिधियों के निकट संबंधियों के नाम पर मनरेगा जॉब कार्ड बनाकर विभिन्न योजनाओं में मजदूर के रूप में कार्य दर्शाते हुए सरकारी राशि का भुगतान किए जाने सहित कई अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है।

रिपोर्ट में दोषियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई, अनियमित भुगतान की वसूली तथा नियमानुसार आवश्यक कानूनी कार्रवाई की अनुशंसा भी की गई है। इसके बावजूद अब तक प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज नहीं होने से पूरे मामले को लेकर प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं।


डीआरडीए द्वारा उप विकास आयुक्त को भेजी गई जांच रिपोर्ट के अनुसार, प्राप्त शिकायत के आधार पर अभिलेखों एवं स्थलीय जांच की गई। जांच में मुखिया के पुत्र, मुखिया प्रतिनिधि की पत्नी, मुखिया के दामाद तथा मुखिया की पुत्री के नाम पर मनरेगा जॉब कार्ड बनाकर विभिन्न योजनाओं में कार्य दर्शाने और उनके बैंक खातों में मजदूरी राशि का भुगतान किए जाने का उल्लेख किया गया है। प्रतिवेदन में संबंधित व्यक्तियों को अलग-अलग योजनाओं में कार्यरत दिखाकर हजारों रुपये का भुगतान किए जाने का भी जिक्र है।


जांच के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के लाभार्थी चयन से जुड़े आरोपों की भी समीक्षा की गई। रिपोर्ट में संबंधित पक्षों को कारण बताओ नोटिस जारी करने तथा चार बिंदुओं पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने की अनुशंसा की गई है।
इधर, सीमांचल सेवा फाउंडेशन (पंजीकृत) के संस्थापक हसीबुर रहमान ने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, पंचायती राज विभाग के सचिव, पुलिस महानिदेशक एवं जिला पदाधिकारी, किशनगंज को शिकायत भेजकर ग्राम पंचायत दिघलबैंक की मुखिया पूनम देवी एवं अन्य संबंधित लोगों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम तथा अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।


शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मुखिया के पुत्र, पुत्री, दामाद एवं अन्य निकट संबंधियों के नाम पर मनरेगा जॉब कार्ड बनाकर सरकारी राशि का भुगतान कराया गया। साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ ऐसे व्यक्ति को दिए जाने का भी आरोप लगाया गया है, जिसके पास पहले से पक्का एवं बहुमंजिला मकान था। शिकायत में मास्टर रोल में कथित हस्ताक्षर संबंधी विसंगतियों एवं सरकारी अभिलेखों में अनियमितताओं का भी उल्लेख किया गया है। संस्था का दावा है कि शिकायत के साथ डीआरडीए की जांच रिपोर्ट सहित 22 पृष्ठों के दस्तावेजी साक्ष्य संलग्न किए गए हैं।


सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब डीआरडीए जैसी सक्षम प्रशासनिक एजेंसी की जांच रिपोर्ट में अनियमितताओं का उल्लेख करते हुए विभागीय एवं आवश्यक कार्रवाई की अनुशंसा की जा चुकी है, तो अब तक संबंधित मामले में एफआईआर क्यों दर्ज नहीं हुई? कार्रवाई में हो रही देरी अब जिले में चर्चा का विषय बन गई है। लोगों के बीच यह सवाल लगातार उठ रहा है कि यदि जांच रिपोर्ट प्रशासन के पास उपलब्ध है, तो कानूनी प्रक्रिया शुरू होने में आखिर विलंब किस कारण से हो रहा है। प्रशासन की ओर से अब तक स्पष्ट जवाब सामने नहीं आने से मामले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।


हालांकि, इस मामले में ग्राम पंचायत दिघलबैंक की मुखिया पूनम देवी ने सभी आरोपों को बेबुनियाद और निराधार बताया है। उनका कहना है कि उन्हें जांच की कोई सूचना नहीं दी गई और न ही जांच के दौरान उनका पक्ष लिया गया। उन्होंने कहा कि वे सभी आरोपों का कानूनी रूप से जवाब देंगी।


वहीं, उप विकास आयुक्त प्रदीप कुमार झा ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में है। उन्होंने बताया कि “दो दिन बाद इस संबंध में विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी।


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