शांति को बढ़ावा देने के लिए शिक्षा महत्वपूर्ण :- प्रवीण कुमार प्रणव


ब्यूरो-रिपोर्ट

बांका:केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद के तत्वावधान में इनहाउस ट्रेनिंग प्रोग्राम के तहत गुरुवार 5 जनवरी को एसकेपी विद्या विहार राजपुर प्लस टू आवासीय विद्यालय बांका बिहार में “एजुकेशन फॉर पीस” का एक दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में जीव विज्ञान शिक्षक सह जिला पर्यावरण विशेषज्ञ व भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी बांका जिला ईकाई प्रबंध कमेटी सदस्य प्रवीण कुमार प्रणव ने प्रशिक्षण देते हुए बताया कि शिक्षा और शांति का सामंजस्य पौराणिक है, और मुख्यतः शांति के लिए ही शिक्षित किया जाना मानव का परम कर्तव्य है। चाहे वह आत्मिक शांति हो या घर की शांति हो या समाज की शांति हो या राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर की शांति हो। जब तक मानव शांत नहीं रहेगा और शांति पाने के लिए उच्च शिक्षा को ग्रहण नहीं करेगा तब तक मानव का जीवन सफल नहीं होगा ।

शांति को बढ़ावा देने में शिक्षा का बहुत बड़ा महत्व है । जब शांति के लिए शिक्षा दी जाएगी तब मानवता पैदा होगी। विश्व में स्थिरता आ जाएगी ।आपसी भेदभाव दूर होगा । सद्भावना का प्रचार होगा। समुदाय में रहने के लिए और मानवता के लिए बुनियादी आधार है शांति ! शांति से सामंजस्य पूर्ण जीने का कौशल विकसित होगा। इससे मानव का खुद विकास होगा। उसे कैसे जीना चाहिए ।उसे कैसे आगे बढ़ना चाहिए । उसे दूसरों के सामने कैसे व्यवहार करना चाहिए ।एक अच्छा मनुष्य बनने के लिए शिक्षा में शांति का बहुत बड़ा योगदान है ।इससे संपूर्ण विश्व में शांति की स्थापना हो जाएगी। विश्व में आत्मविश्वास और शांति पैदा हो जाएगी। जिसका दूत भारत बनेगा ।शिक्षा तो रावण और कंस में भी था लेकिन वह शांति का पाठ नहीं पढ़ा था । परंतु राजा जनक में शिक्षा के साथ शांति का पाठ समाहित था।

गुरु वशिष्ठ मुनि ने श्री रामचंद्र जी को वेद पुराण के साथ-साथ शांति की शिक्षा दी थी और गुरु विश्वामित्र ने शस्त्र अस्त्र-शस्त्र की शिक्षा मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामचंद्र जी को दिए थे।जिससे गुरु वशिष्ठ मुनि के बताए हुए मार्ग पर वह शांति को ही आगे रख कर हमेशा कार्य किए और लंका को जीत करके भी अपने अधीन नहीं किए बल्कि विश्व मैत्री का हाथ बढ़ाया और लंका वासियों को ही देकर वापस आए। शिक्षकों को वर्ग में पहुंचकर सबसे पहले शांति स्थापित करना चाहिए और सभी छात्रों के ध्यान मन को अपने शैक्षणिक शब्दों से एकाग्रचित करने की आदत डालनी चाहिए।

मानव को शांत एकांत होकर हरेक सांसों में किन्हीं इष्ट देव को समाहित करना चाहिए।जो कि जीवन के अंतिम सांस तक रहे। समयानुसार मौन व्रत धारण करना चाहिए। मूलत: शांति ही शिक्षा की प्रकृति है ।इसके बिना शिक्षा अधूरी है।इस अवसर पर प्राचार्य मानस कुमार पाठक, डॉक्टर केसी मिश्रा ,डॉ अजय कुमार सिंह, कैलाश कुमार झा ,आशीष कुमार झा ,मनोज कुमार सिन्हा ,मनोज कुमार झा ,भरत नित्यम, राकेश कुमार झा ,उदय रावत ,ममता सिंह , मीता सिंह ,मालविका दास ,नीलम सिंह ,उदय रावत ,एचएन सिंह, प्रभाकर सिंह, वीरेंद्र सिंह , उल्लास किशोर दास, रामा प्रसाद दास सहित अन्य विद्वतजन और कर्मचारी मुकुंद मोहन झा, रामानुज, सूरज उपस्थित थे।

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