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पांच रुपए के पुरस्कार ने सफल पत्रकार बनाया – देवेंद्र खन्ना

मुंबई ( गिरजा शंकर अग्रवाल) – वसई के गौरव पुस्तिका की परिकल्पना व लेखन संपादन देवेंद्र दर्शनलाल खन्ना द्वारा किया गया है। देवेंद्र लगभग ३३ वर्ष से पत्रकारिता क्षेत्र में सक्रिय है। दिल्ली में जन्मे पले बडे देवेंद्र खन्ना की स्कूल व कॉलेज की शिक्षा भी दिल्ली में ही हुई। कॉलेज के समय से ही देवेंद्र खन्ना को जब बच्चो की पत्रिका मधुमुस्कान में एक चुटकला लिखने पर पांच रुपये का पुरस्कार मिला, तभी उनमें एक लेखक ने जनम लिया। उस पांच रुपये के पुरस्कार के बाद देवेंद्र की रूचि लेखन में एकाएक बढ़ गयी। वह शुरू में कविताएं लिखते रहे। फिर पत्र पत्रिकाओं मे लेख लिखने लगे। देखते ही देखते ये दिल्ली के जाने पहचाने पत्रकारों की श्रेणी में आने लगे। इन्होने “नव भारत टाइम्स, जनसत्ता, हिंदी मिड डे, पब्लिक एशिया, दैनिक जागरण, आज, अमर उजाला, उत्तर उजाला, स्वतंत्र भारत, पंजाब केसरी, दैनिक ट्रिब्यून, अजीत समाचार, राष्ट्रीय सहारा, राजस्थान पत्रिका, नव ज्योति, लोकमत समाचार, संध्या टाइम्स, सांझ जनसत्ता, माया तथा मनोरमा जैसी लोकप्रिय पत्रिकाओं आदि सहित लगभग ५० से ज्यादा समाचार पत्रों मे नियमित लेख लिखते रहे। देवेंद्र यूं तो हर विषय पर लिखते रहे, लेकिन मनोरंजन इनका प्रिय विषय रहा। दिल्ली में रहते हुए १९९५ मे देवेंद्र को मुंबई आने का अवसर तब मिला जब शोमेन सुभाष घई व न्यूज़ २४ की मालकिन अनुराधा प्रसाद ने एक कंपनी दृष्टि चैनल बनाई। इसी कंपनी के पीआर के कार्य हेतु ये मुंबई आए। उस समय टी. वी. का बूम था लगभग १० से १५ नये चैनल सुरु हुए थे। देवेंद्र खन्ना बताते हैं कि “क्योंकि मे मुंबई मे नया था इसलिए यहाँ का माहौल मुझे समझ नहीं आया और इसी कारण मैं अपने काम में १०० प्रतिशत नतीजा नही दे पा रहा था लिहाजा मेने नौकरी छोड़ दी। उसके बाद स्वतंत्र पत्रकारिता करता रहा। पत्रकारिता के साथ साथ इन्हे प्रचारक का काम भी मिलने लगा। एक टाइम ऐसा भी था कि ये पंजाबी फिल्मो के एक मात्र प्रचारक बन गए। इन्होने पिंघा प्यार दिया, मेरा घर कित्थे है, नदियों बिछड़े नीर, खालसो मेरो रूप है ख़ास, तेरा मेरा प्यार, राजनीती आदि दर्जनों मूवी का प्रचार किया। दर्जनभर धारावाहिकों में भी ये बतौर प्रचारक रहे । जिनमे अपराजिता, मिस्टर हीरो, चिरंजीवी, मीरा बाई आदि अहम रहे। इसके साथ ही इन्होने दर्जनों हिंदी फिल्मे भी बतौर प्रचारक की, जिनमे लेडी डकैत, उल गुलान, जख्मी अरौत, खास रही। इस सफर में म्यूजिक कंपनी के मालिक भी बने। जिनके तहत लगभग १० एल्बम रिलीज़ किये गए और इसी क्रम मे फिल्मो का निर्माण भी किया।देवेंद्र बताते है की कुछ पारिवारिक, निजी कारणों के चलते मुंबई से लगभग २० वर्ष दूर रहे और वसई मे अपना खुद का समाचार पत्र वसई सत्ता चलते रहे। अब ये पिछले २ वर्षो से यूट्यूब पर अपने २ चैनल चला रहे है, एक “वसई सत्ता” जो कि अब “वी एस नेशन” बन गया है, दूसरा धार्मिक चैनल मंगल कथा कीर्तन। कुछ क्रिएटिव करने की इच्छा इन्हें कुछ न कुछ नया करने पर मजबूर करती रहती है। वसई में इन्होंने गायन तथा नृत्य प्रतियोगिताेओ के आयोजन के साथ साथ एजुकेशन मेला महिला दिवस पर कार्यक्रम व नारी शक्ति सम्मान का आयोजन कर चुके है। २०२१ मे जो इन्होने एवरग्रीन ब्यूटी कांटेस्ट का आयोजन किया जिसमैं ३० से ७० साल की महिलाओ ने भाग लिया और वो रैम्प पर उतरी। इसके साथ ही इस प्रतियोगिता मे भाग लेने वाली महिलाओ को एल्बम व शार्ट फिल्म में अभिनय का मौक़ा भी दिया। वसई गौरव अवार्ड के विषय में देवेंद्र बताते हैं कि दरअसल मैंने वर्ष २००० मे मुंबई मे मुंबई गौरव अवार्ड का आयोजन करने की योजना बनाई, मगर अचानक फिल्मो में व्यस्तता के चलते योजना सफल नहीं हो पाई। अब अचानक पुरानी फाइलों की सफाई करते हुए जब मुंबई गौरव के डिज़ाइन मिले तो मैंने वसई गौरव अवार्ड की योजना बनाई और दोस्तों के सहयोग और भगवान के आशीर्वाद से अब हो रहा है। मगर ये आयोजन यादगार बने और लोग इसे हमेशा याद रखें इसके लिए मैंने वसई के चुने हुए वसई गौरवो को लेकर इस पुस्तक का प्रकाशन किया है। यहाँ मै ये भी बताना चाहूंगा की वसई में प्रतिभाओ की कोई कमी नहीं है। मगर उनके लिए मंच उपलब्ध नहीं है और मेरा प्रयास है कि कम से कम कला संस्कृति क्षेत्र में लोगो के लिए एक मंच तैयार कर पाऊ।


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