जीवन से अंधकार दूर करते है गुरु: डॉ शीतला प्रसाद त्रिपाठी

समाज जागरण रंजीत तिवारी
वाराणसी।।
जीवन नैय्या को आगे बढ़ाने में गुरु का सबसे बड़ा योगदान होता है, गुरु व्यक्ति को खुद पर भरोसा करना सिखाता है कि, ‘तैरना शुरू करो, घबराओ नहीं, अगर डूबोगे तो मैं हूं न तुम्हें बचाने के लिए।’ गुरु वास्तव में कोई व्यक्ति नहीं, अपितु उसके भीतर निहित ज्ञान है। गुरु की पूजा व्यक्ति की पूजा न होकर, गुरु की देह में समाहित ज्ञान की पूजा है।
आज गुरु पूर्णिमा के अवसर पर शिव शक्ति ज्योतिष परामर्श केंद्र पर गुरु डॉ शीतला प्रसाद त्रिपाठी (ज्योतिषाचार्य) के शिष्यों ने गुरु के चरणो में शिश नवाया और उनका वंदन किया।इस मौके पर शीतला प्रसाद त्रिपाठी ने कहा यह निश्चित है कि जो ईश्वर को पाना चाहता है, वह बिना गुरु के एक पग भी नहीं चल सकता। वास्तव में गुरु और शिष्य, दो दिखते हुए भी दो नहीं होते, देखा जाए तो गुरु और शिष्य के संबंध एकात्मक होते हैं।देर शाम तक उनके आवास पर भक्तों का आवागमन लगा रहा ।शिष्य अपने गुरु के हाथों प्रसाद प्राप्त कर अपने आप को ध्यान कर लिया। मुख्य रूप से अरुण पांडेय, सीता
रागिनी पांडेय,सीता जायसवाल,कल्लू जैसवाल सहित अन्य शिष्य उपस्थित रहे

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