समाज जागरण
गुरुग्राम हरियाणा 02 मार्च 2025 । भारत के पहले विश्व शांति केन्द्र पर आज आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर ने कहा है कि किसी भी राष्ट्र मे ज्ञान की चर्चा तभी हो सकती है जब उसके पास मे शस्त्र हो। हिंसा को रोकना भी अहिंसा ही है। उन्होंने कहा कि हिंसा को अन्यायपूर्ण तरीके से सहन करना भी हिंसा ही है। किसी भी प्रकार के हिंसा को मंजूरी देना भी हिंसा है। उस हिंसा को रोकने के लिए योद्धाओं की जरूरत पड़ती है। सनातन धर्म यही तो है..”

श्री श्री रविशंकर जी पहले विश्व शांति केंद्र पर आयोजित कार्यक्रम मे बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि शस्त्र से एक राष्ट्र मजबूत होता है तब जाकर उस राष्ट्र मे शास्त्र की बात होती है। उन्होंने सिपाहियों को संबोधित करते हुए कहा कि “.. आपको आत्मग्लानि नही होनी चाहिए। आप तो अहिंसा ही कर रहे हो।” हिंसा को रोकना भी अहिंसा ही है। तप से ही कल्याण होता है । जो लोग तप नही करते है वह लोग किधर के भी नही होते है। मौन सबसे बड़ा तप है।
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