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*“हिन्दी उपन्यास का स्त्री वर्ष — नौ स्त्री कथाकारों की ऐतिहासिक प्रस्तुति”*

“राजकमल प्रकाशन का साहित्यिक उत्सव: स्त्री-स्वर, उपन्यास और रचनात्मक वैभव का संगम”*

विशेष रिपोर्ट: रविंद्र आर्य
एक संयुक्त, व्यापक और पूर्ण समाचार लेख

*राजकमल ने मनाया हिन्दी उपन्यास का स्त्री वर्ष, नौ स्त्री कथाकारों के उपन्यास एकसाथ हुए प्रकाशित*

नई दिल्ली:
राजकमल प्रकाशन समूह ने इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में ‘हिन्दी उपन्यास का स्त्री वर्ष : भेंट, पाठ, चर्चा’ का आयोजन किया। यह कार्यक्रम समकालीन हिन्दी उपन्यासों में स्त्री-स्वर, स्त्री-अनुभव और रचनात्मक विस्तार को रेखांकित करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया। इस अवसर पर राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित नौ स्त्री-कथाकारों के उपन्यास लेखकों को भेंट किए गए और उनके चुनिंदा अंशों की पाठ-प्रस्तुतियाँ दी गईं।



स्त्री-वर्ष में प्रकाशित रचनाकारों में साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित लेखक अनामिका, जया जादवानी, वन्दना राग, प्रत्यक्षा, सुजाता, सविता भार्गव और शोभा लिम्बू ने कार्यक्रम में अपनी कृतियों की कथावस्तु से परिचय कराया। वहीं अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार से सम्मानित लेखक गीतांजलि श्री और साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित कथाकार अलका सरावगी ने रिकॉर्डेड वीडियो संदेशों के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज करायी। कार्यक्रम में अध्यक्ष की भूमिका में वरिष्ठ कथाकार मृदुला गर्ग उपस्थित रहीं और संचालन सुदीप्ति ने किया। इस दौरान तृप्ति जौहरी, अन्नु प्रिया, डॉ. शुचिता, प्रियंका शर्मा और रैना तँवर आदि रंगकर्मियों ने नौ उपन्यासों से चयनित अंशों का पाठ किया।

इस आयोजन ने आधुनिक हिन्दी उपन्यास में स्त्री-दृष्टि की समृद्ध रचनात्मक परंपरा को एक मंच पर प्रस्तुत कर साहित्यिक समुदाय के बीच एक जीवंत संवाद स्थापित किया। अध्यक्षीय वक्तव्य में मृदुला गर्ग ने समकालीन स्त्री-लेखन की रचनात्मकता और उसके सामाजिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह पहल हिन्दी साहित्य में एक महत्वपूर्ण क्षण को दर्ज करती है। राजकमल प्रकाशन के कार्यकारी निदेशक आमोद महेश्वरी ने सभी लेखकों, उपस्थित साहित्यप्रेमियों और साझेदार संस्थानों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।

*स्त्री वर्ष में प्रकाशित उपन्यास*

• सह-सा – गीतांजलि श्री
• कलकत्ता कॉस्मोपॉलिटन : दिल और दरारें – अलका सरावगी
• दूर देश के परिन्दे – अनामिका
• शीशाघर – प्रत्यक्षा
• सरकफंदा – वन्दना राग
• इस शहर में इक शहर था – जया जादवानी
• दरयागंज वाया बाज़ार फ़त्ते ख़ाँ – सुजाता
• जहाज़ पाँच पाल वाला – सविता भार्गव
• शुकमाया हांङमा – शोभा लिम्बू

*हिन्दी लोकवृत के एक ऐतिहासिक क्षण का उत्सव*

कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए सुदीप्ति ने कहा, यह आयोजन केवल नौ समकालीन स्त्री रचनाकारों के उपन्यासों पर केंद्रित एक सामान्य साहित्यिक बातचीत नहीं, बल्कि हिन्दी लोकवृत के एक ऐतिहासिक क्षण का उत्सव है। यह उस यात्रा का सम्मान है जिसमें एक सदी से अधिक लंबे संघर्ष के बाद स्त्री-स्वर ने साहित्य में अपनी सम्पूर्णता और अपनी वैचारिक स्वतंत्रता स्थापित की है।

आगे उन्होंने कहा, आज का समय इस बात का प्रमाण है कि स्त्री रचनाकार अब किसी एक श्रेणी, किसी एक लेबल, या किसी नारे के भीतर सीमित नहीं हैं; उनकी रचनाशीलता अपने पूरे वैचारिक और सौंदर्यात्मक विस्तार के साथ उपस्थित है। इन नौ उपन्यासों को पढ़ते हुए स्पष्ट होता है कि समकालीन स्त्री रचनाकार इतिहास, समाज और अपने समय की जटिलताओं को नई दृष्टि से पुनर्परिभाषित कर रही हैं। वे केवल स्त्री के हिस्से की दुनिया नहीं लिख रहीं, बल्कि स्त्री-नज़र से इस पूरे संसार का पुन: सृजन कर रही हैं।

*स्त्री-लेखन के बहुरंगी विस्तार को रेखांकित करने का प्रयास*

इससे पहले, राजकमल प्रकाशन समूह के अध्यक्ष अशोक महेश्वरी ने स्वागत वक्तव्य दिया और उपस्थित लेखकों को उनके उपन्यास भेंट किए। स्वागत वक्तव्य में अशोक महेश्वरी ने कहा, यह आयोजन समकालीन हिन्दी साहित्य में स्त्री-लेखन के बहुरंगी विस्तार और उसकी विविधतापूर्ण व्यापकता की उपलब्धि को रेखांकित करने का विनम्र प्रयास है। हिन्दी में शायद यह पहला सुखद अवसर होगा जब एक ही वर्ष में इतने स्त्री कथाकारों के उपन्यास एक साथ आमने आये हों। यह हम सबकी साझा ख़ुशी का अवसर है।

उन्होंने आगे कहा, यह बात पहले भी कही गई है कि हिन्दी में इस समय जितनी स्त्री रचनाकार सक्रिय हैं उतनी पहले कभी नहीं थीं। युवतम से लेकर वरिष्ठतम तक। वे समय के सीने पर जो कुछ दर्ज कर रही हैं वह ‘स्व’ तक सीमित नहीं है, वह सर्वस्व को समेट रहा है। इस रचनात्मक उत्कर्ष का, इस विस्तार का और इस व्यापकता का स्वागत करने के उद्देश्य से ही हमने मौजूदा बनती हुई सदी को ‘स्त्री सदी’ कहा। इसी क्रम में, हमने 2025-2026 को हिन्दी उपन्यास के ‘स्त्री वर्ष’ के रूप में मनाने का निर्णय किया।

रविंद्र आर्य
(विश्लेषणात्मक पत्रकार, लेखक और भारतीय लोकसंस्कृति के संवाहक हैं।)

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