डंके की चोट पर हिंदुस्तान पावर डाल रहा फ्लाईएश वाहन मालिकों की जेब पर डाका

ओवर स्पीड के नाम पर प्रतिमाह वाहन मालिकों से वसूली जा रही राशि, यहां चल रहा कंपनी का अपना कानून
जिले के जैतहरी स्थित हिंदुस्तान पावर प्लांट (मोजर बेयर)प्रबंधन की अपनी मनमानी नीतियों ने हर समय प्रभावित किसानों व स्थानीय नागरिकों के साथ धोखाधड़ी की है। इस बार मामला धोखाधड़ी का नहीं बल्कि फ्लाईएश का परिवहन कर रहे वाहन मालिकों की जेब पर डाका डालने का है। जिसमें ओवर स्पीड के नाम पर हर वाहन मालिक से एक मोटी रकम वेंडर के जरिए वसूल की गई है। इसको लेकर पीडि़त वाहन मालिकों ने शनिवार को मटेरियल गेट के सामने चक्का जाम करते हुए धरना दिया गया। इस मामले के संबंध में पहले ही मां नर्मदा फ्लाईएश ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के द्वारा प्रबंधन व प्रशासन को जानकारी दी गई थी, लेकिन फ्लाईएश का परिवहन करने वाले वाहन मालिकों की पीड़ा किसी ने नहीं समझी। जिसके कारण अब वाहन मालिक आंदोलन की राह पर हैं।
दैनिक समाज जागरण
विजय तिवारी
अनूपपुर। जिला प्रशासन अनूपपुर के सामने हिंदुस्तान पावर प्लांट प्रबंधन जैतहरी के द्वारा एक नई चुनौती खड़ी कर दी गई है। वह चुनौती है फ्लाईएश के परिवहन में लगे वाहनों की ओवर स्पीड पर वेंडर के माध्यम से वाहन मालिकों के बिल से प्रतिमाह रुपए काटे जाने की। यह तब स्पष्ट दिखाई पड़ा जब शनिवार को पावर प्लांट के मटेरियल गेट को मां नर्मदा ट्रक ओनर एसोसिएशन के द्वारा प्लांट प्रबंधन की मनमानी के विरोध में चका जाम कर दिया गया। फिर सवाल खड़ा होना तो लाजमी है कि सडक़ पर दौडऩे वाले वाहनों पर कार्रवाई का अधिकार तो सडक़ परिवहन विभाग या फिर यातायात विभाग को है। वैसे भी हिंदुस्तान पावर प्लांट जैतहरी का प्रबंध शासन का कोई उपक्रम नहीं है और ना ही शासन के द्वारा उसे संवैधानिक प्रावधानों के तहत प्रदाय नियमों में किसी प्रकार की कार्रवाई का विशेषाधिकार दिया गया है। ऐसे में हिंदुस्तान पावर प्लांट जैतहरी प्रबंधन द्वारा वाहन मालिकों के बिलों से काटी गई राशि खुलेआम डाका डालना न कहा जाए तो फिर क्या कहा जाए?
शासन का राजस्व डकार रहा प्रबंधन
किसी भी औद्योगिक संस्थान के द्वारा निधारित की जाने वाली नीति व लागू किए जाने वाले प्रावधान की जानकारी प्रशासन देनी होगी, यह बात स्पष्ट है। क्योंकि किसी भी अपरिहार्य स्थिति से अंत: प्रशासन को जूझना पड़ता है। ऐसे में प्रबंधन ने यदि ओवर स्पीड के मामले में कार्रवाई का प्रावधान किया है तो उसकी जानकारी जिले के परिवहन व यातायात और पुलिस अधीक्षक कार्यालय तक देनी चाहिए। क्योंकि यहां पर सीधे-सीधे एक मोटी रकम का राजस्व प्रतिमाह हिंदुस्तान पावर प्रबंधन जैतहरी के द्वारा वाहन मालिकों पर ओवर स्पीड के जरिए प्राप्त किया जा रहा है। लेकिन वह शासन के खाते में कहीं जमा नहीं है। जबकि शासन की आय का एक मात्र स्त्रोत विभिन्न प्रकार से प्राप्त होने वाला राजस्व है। जानकार सूत्र बताते हैं कि यहां राखड़ के परिवहन में लगभग १५० वाहन लगे हैं। प्रति वाहन पर १५ हजार रुपए ओवर स्पीड की राशि काटी जा रही है। ऐसे में बीते ६ माह से हिंदुस्तान पावर प्रबंधन के द्वारा लगभग १ करोड़ रुपए वाहन मालिकों से इस मामले में प्राप्त किया है। सीधे तौर पर यह मप्र शासन को क्षति पहुंचाना है।
प्रशासन लेगा संज्ञान या होगी मनमानी
यह कोई छोटा विषय नहीं है, क्योंकि कार्यपालिका के अधिकार एक निजी कंपनी के द्वारा अपने आप में समाहित कर लिए गए हैं। जबकि हमारे देश में सरकार के तीन अंग माने गए हैं और तीनों को अपनी अपनी शक्तियां प्रदाय की गई है। जिसमें कि विधायिका का काम कानून बनाना है और कार्यपालिका का मुख्य काम उन कानूनों को लागू कराना या उसका पालन कराना है। जबकि न्यायपालिका का काम उन कानूनों की समीक्षा करना है। लेकिन अनूपपुर ऐसा बिरला जिला होगा जहां शासन के कानून को एक निजी पावर कंपनी द्वारा अपने हाथ में खुलेआम लिया गया। ऐसे में जिला प्रशासन इस पूरे मामले में क्या हिंदुस्तान पावर प्रबंधन के विरूद्ध कार्रवाई का कदम उठाएगा या फिर उसकी मनमानी चलती रहेगी।
प्रदर्शनकारियों की यह भी है मांगें
मां नर्मदा फ्लाईएश ट्रक एसोसिएशन के द्वारा जिला प्रशासन को प्रदर्शन के पूर्व दिए गए ज्ञापन में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि प्रबंधन द्वारा फ्लाईएश के परिवहन में लगातार नए नए वेंडरों को कार्य देकर स्थानीय परिवहन कर्ताओं के लिए अनेक प्रकार की समस्याएं उत्पन्न की जा रही है। जिसका समाधान किया जाना चाहिए। वहीं वेंडरों के द्वारा प्रतिमाह नियत तारीख तक वाहन मालिकों को भुगतान नहीं किए जाने से वह जहां समय पर वाहन की किस्त अदा कर पाते हैं जिसके कारण उनकी क्रेडिट बैंक में खराब होती है। इसके अलावा परिवार के भरण पोषण के लिए भी उन्हें जूझना पड़ता है। स्थानीय स्तर पर रोजगार होने के बावजूद कंपनी का स्वहित में दोहरा रवैया स्थानीय युवाओं को बेरोजगारी के कगार पर ले जाता दिखाई पड़ रहा है।
इनका कहना है
यह कंपनी का वेंडर से अनुबंध हो सकता है। लेकिन कंपनी द्वारा तय की गई कॉन्टेक्ट नीतियों का हमारे पास किसी प्रकार की जानकारी नहीं आई है। जांच करवाता हूं कि आखिर यह प्रावधान किस आधार पर किया गया है।

सुरेन्द्र सिंह गौतम, जिला परिवहन अधिकारी अनूपपुर।

इनका कहना है
हमारे द्वारा १० दिन पहले हिंदुस्तान पावर प्रबंधन जैतहरी को मांगों से भरा ज्ञापन सौंपा गया था, लेकिन प्रबंधन के द्वारा उसपर बात करना ही उचित नहीं समझा गया। जिसके बाद ८ मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की सूचना एसडीएम जैतहरी को दी गई है। हमारी मांग है कि प्रबंधन किस अधिकार के तहत ओवर स्पीड के मामले में वाहन मालिकों की राशि काट रहा है, और नियम व प्रावधान बताया जाए। मांगे पूरी नहीं होने तक प्रदर्शन जारी रहेगा।
रवीन्द्र (रवि) राठौर, अध्यक्ष मां नर्मदा फ्लाईएश ट्रक एसोसिएशन जैतहरी।

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