संस्कारों की जीवन में अहम भूमिकाःस्वामी श्री सुशांतानंद गिरि जी महाराज

महाराज जी ने कहा-अच्छे संस्कारों के कारण गोकर्ण बने परमज्ञानी पंडित तो बुरे संस्कारों के कारण धुंधकारी बना महा दुष्ट

मन्नू शर्मा पराशर समाज जागरण चीफ ब्यूरो पंजाब

जैतो, 12 सितंबर : श्री कल्याण कमल आश्रम हरिद्वार के अनंत श्री विभूषित 1008 महामंडलेश्वर स्वामी श्री कमलानंद गिरि जी महाराज के शिष्य श्रद्धेय स्वामी श्री सुशांतानंद गिरि जी महाराज ने श्रीमद् भागवत प्रवचन के दौरान गोकर्ण और धुंधकारी का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि आत्मदेव नाम के ब्राह्मण के दो पुत्र हैं। एक तो संत के प्रसाद के रुप में प्राप्त श्री गोकर्ण जी महाराज हैं तो दूसरे झूठ-मूठ से प्राप्त पुत्र धुंधकारी है। दोनों ही एक ही आंगन में एक साथ पले-बढ़े, मगर एक तो परम ज्ञानी हो गए और एक बहुत मूर्ख हो गया। दोनों के प्रसंग से यह शिक्षा मिलती है कि जीवन में संस्कार सबसे अहम भूमिका निभाता है। संगति कैसी है यह मायने रखता है। गोकर्ण हमेशा संतों एवं महापुरुषों की शरण में रहता था, सत्संग में रहता था इसलिए वो महाज्ञानी पंडित बन गए थे और अंतिम अवस्था में अपने पिता को आत्म बोध करवाकर मुक्ति दिलाई थी। जबकि धुंधकारी महा दुष्ट था जो हमेशा अपने माता-पिता को मारता रहता था और अंत में वैश्याओं के द्वारा खुद भी मारा गया व प्रेत योनि को प्राप्त हुआ ।
महाराज जी ने यह विचार जैतो स्थित श्री कल्याण कमल सन्यास आश्रम में 15 दिवसीय श्रीमद् भागवत प्रवचन कार्यक्रम के दौरान शुक्रवार को प्रवचनों की अमृतवर्षा करते हुए व्यक्त किए। महाराज जी ने इस प्रसंग से मिलने वाली प्रेरणा पर चर्चा करते हुए कहा कि जैसे पांच वैश्याओं ने धुंधकारी को मारा वैसे ही मनुष्य शरीर में पांच वैश्या रुपी इंद्रियां हैं जिनका भरण-पोषण करते-करते जीवन निकल जाता है परंतु परमात्मा का बोध नहीं हो सकता। इसलिए समझदार व्यक्ति को सांसारिक कर्म करते हुए परमात्मा को हमेशा याद रखना चाहिए । गौरतलब है कि जैतो के श्री कल्याण कमल सन्यास आश्रम में 15 दिवसीय श्रीमद् भागवत प्रवचन कार्यक्रम का आयोजन हो रहा है। जिसमें रोजाना बड़ी गिनती में श्रद्धालु पहुंच कर पितृ पक्ष में स्वामी श्री सुशांतानंद गिरि जी महाराज के मुखारविंद से श्रीमद् भागवत प्रवचन श्रवण कर जीवन सफल बना रहे हैं। इस मौके बड़ी गिनती में श्रद्धालु उपस्थित थे जिन्होंने स्वामी श्री सुशांतानंद गिरि जी महाराज से आशीर्वाद प्राप्त कर जीवन सफल बनाया। आश्रम प्रांगण सद्गुरु देव महाराज के जयकारों से गूंज उठा। जैतो स्थित श्री सन्यास आश्रम में प्रवचन करते हुए स्वामी श्री सुशांतानंद गिरि जी महाराज एवं उपस्थित श्रद्धालु।

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