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सड़क हादसे में घायलों को 1.50 लाख तक कैशलेस इलाज, पैसे की चिंता में नहीं रुकेगा उपचार

किशनगंज के चयनित अस्पतालों में सात दिनों तक इलाज की सुविधा, गोल्डन ऑवर में उपचार से बच सकती है जान

वीरेंद्र चौहान, समाज जागरण ब्यूरो, किशनगंज।
सड़क दुर्घटना में घायल लोगों को समय पर इलाज उपलब्ध कराने और आर्थिक परेशानी के कारण उपचार में होने वाली देरी को रोकने के उद्देश्य से कैशलेस उपचार की व्यवस्था की गई है। इसके तहत पात्र घायलों को निर्धारित नियमों और प्रक्रिया के अनुसार सात दिनों तक अधिकतम 1.50 लाख रुपये तक के इलाज की सुविधा मिल सकती है। इससे दुर्घटना के बाद घायल व्यक्ति और उसके परिजनों को तत्काल इलाज के खर्च का इंतजाम करने की चिंता से राहत मिलेगी।


आयुष्मान भारत कार्यक्रम के जिला समन्वयक पंकज कुमार ने बताया कि सड़क दुर्घटना के बाद शुरुआती समय में मिलने वाला उपचार घायल की जान बचाने में निर्णायक साबित हो सकता है। गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को तत्काल जांच, दवा, शल्य चिकित्सा और अन्य आवश्यक चिकित्सा सेवाओं की जरूरत पड़ती है। ऐसे में आर्थिक तंगी के कारण इलाज में देरी नहीं होनी चाहिए। कैशलेस उपचार की व्यवस्था का उद्देश्य जरूरतमंद पात्र घायलों को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना और उनके परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करना है।

जिले के चयनित अस्पतालों में मिलेगी सुविधा

प्रेस विज्ञप्ति में दी गई जानकारी के अनुसार, किशनगंज जिले में इस योजना के तहत एमजीएम मेडिकल कॉलेज, क्रिब्स हॉस्पिटल, नियाज मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, ठाकुरगंज, रेडियंट मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, जेड ए नर्सिंग होम, डॉ. निरंजन चाइल्ड केयर, सेकंड साइट केयर और बीआर नेत्रालय के नाम शामिल हैं। दुर्घटना की स्थिति में घायलों को उपयुक्त अस्पताल तक पहुंचाने और योजना के तहत उपचार की प्रक्रिया पूरी कराने में संबंधित संस्थानों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

टीएमएस 2.0 पोर्टल के माध्यम से होगी प्रक्रिया

पंकज कुमार के अनुसार, सड़क दुर्घटना होने पर घायल व्यक्ति को जल्द से जल्द उपयुक्त अस्पताल पहुंचाना प्राथमिकता होनी चाहिए। निर्धारित प्रक्रिया के तहत अस्पताल द्वारा टीएमएस 2.0 पोर्टल पर घायल की पहचान और आवश्यक विवरण दर्ज किए जाते हैं। इसके बाद पुलिस दुर्घटना से संबंधित जरूरी सत्यापन करती है। निर्धारित दिशा-निर्देशों और पात्रता के अनुसार कैशलेस उपचार की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है। स्वीकृत उपचार का खर्च तय प्रावधानों के तहत कवर किया जाता है।
उन्होंने बताया कि आपात स्थिति में घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने में देरी नहीं करनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर आपातकालीन सहायता के लिए 112 नंबर पर संपर्क किया जा सकता है।

गोल्डन ऑवर में इलाज बेहद महत्वपूर्ण

सड़क दुर्घटना के बाद का पहला घंटा सामान्यतः गोल्डन ऑवर कहलाता है। यह अवधि गंभीर रूप से घायल व्यक्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। इस दौरान रक्तस्राव पर नियंत्रण, सांस संबंधी परेशानी का उपचार और गंभीर चोटों की पहचान कर समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने से घायल की जान बचने की संभावना बढ़ सकती है। दुर्घटना के बाद भीड़ लगाने या वीडियो बनाने के बजाय घायल की मदद करना और आपातकालीन सेवा को सूचना देना जरूरी है।

घायल की मदद के लिए आगे आएं लोग

जिलाधिकारी नवीन कुमार ने कहा कि सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को समय पर उपचार उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। लोगों को दुर्घटना की स्थिति में तमाशबीन बने रहने के बजाय घायल की मदद के लिए आगे आना चाहिए और आपातकालीन सेवा को सूचना देनी चाहिए। कैशलेस उपचार की व्यवस्था का लाभ पात्र व्यक्तियों तक पहुंचाने के लिए जागरूकता और संबंधित संस्थानों के बीच समन्वय आवश्यक है।


सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि गंभीर सड़क दुर्घटना में शुरुआती उपचार अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। आर्थिक परेशानी के कारण इलाज में देरी नहीं होनी चाहिए। आम लोगों को गोल्डन ऑवर का महत्व समझते हुए घायल को जल्द से जल्द उपयुक्त चिकित्सा सुविधा तक पहुंचाने में सहयोग करना चाहिए।


कैशलेस उपचार की यह व्यवस्था सड़क दुर्घटना के बाद आर्थिक राहत देने के साथ समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। लोगों में इसके प्रति जागरूकता बढ़ने और आपातकालीन सेवाओं के साथ बेहतर समन्वय से दुर्घटना में घायल लोगों की जान बचाने में मदद मिल सकती है।


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