मोबाइल की ज़द में

//कहानी//मनोरंजन कुमार सिंह उप-प्रबंधक , एसबीआई

कोटा, राजस्थान “डैडी मेरे मोबाइल का बैलेंस खत्म हो गया, रिचार्ज करा दीजिए।” रोहन अपने पिता से बड़े ही प्यार से दुहराए जा रहा था। अरे बेटे! अभी दो दिनों पहले ही मैंने रिचार्ज कराया था। फिर कैसे मोबाइल का बैलेंस खत्म हो गया। गुरु चरण सिंह ने बेटे रोहन से पूछा तो उसने स्कूल के नोट्स बनाने के लिए ऑनलाइन सर्चिंग में मोबाइल डाटा खत्म हो जाने की बात कह दिया। चलो! स्कूल के काम के लिए यदि मोबाइल से नोट्स बनाने में डेटा खत्म हुआ है तो कोई बात नहीं है और उन्होंने मोबाइल रिचार्ज करा दिया। लेकिन गुरु चरण के मन में आए दिन मोबाइल की लत से होने वाली घटनाओं की आशंका ने घर बना लिया।

    विज्ञान और तकनीक ने समाज को बहुत आगे बढ़ाने का काम किया है लेकिन तकनीक के दुरुपयोग इंसान को काफी नुकसान भी पहुंचाया है। प्रायः रोहन देर रात तक किताब की तह में मोबाईल पर समय बिताने लगा था। जैसे ही कभी पिता गुरुचरण को समीप आते देखता था तो वह कुछ लिखने या फिर पढ़ने का ढोंग करने लग जाता था। बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि का बालक रोहन अपनी कक्षा में हमेशा टॉप करता था। लेकिन पिछले कुछ दिनों  से उसके स्कूल से भी शिक्षकों की तरफ से कहा जाने लगा था कि आजकल रोहन पढ़ाई में ध्यान नहीं लगा रहा है। गुरुचरण की चिंता स्वाभाविक रूप से बढ़ने लगी कि आखिर क्या कारण है कि उनका मेधावी बेटा अचानक पढ़ाई में पीछे होने लगा है। गुरुचरण ने रोहन की मां जानकी से अपनी चिंता साझा करते हुए उसे भी ध्यान रखने की सलाह दिया।

   दोस्तों के साथ बच्चे तो बात करते ही हैं लेकिन रोहन आजकल कुछ ज्यादा ही बातों में मश्गूल रहने लगा था। धीरे धीरे रोहन मोबाइल में ऑनलाइन गेम का आदी हो चुका था। दुनिया भर में फैली साईबर क्राइम के दुष्चक्र में रोहन भी फंसता जा रहा था। एक दिन काफी देर तक जब रोहन ने अपना कमरा नहीं खोला तो उसकी मां जानकी ने गुरुचरण को यह बात बताई। पहले से ही चिंतित गुरुचरण के दिमाग में किसी अनिष्ट की आशंका घर करने लगी। उन्होंने तुरंत ही आकर रोहन को कमरे के दरवाजे खोलने के लिए जोर जोर से बोला। उसके बाद भी जब रोहन ने दरवाजा नहीं खोला तो गुरुचरण ने जोर से धक्का देते हुए दरवाजे को तोड़ दिया। दरवाजे तोड़ते ही उनके होश उड़ गए क्योंकि रोहन मोबाईल पर ऑनलाइन गेमिंग खेलते हुए साईबर अपराध का शिकार हो रहा था और कमरे में लगे पंखे से रस्सी लगाने की कोशिश कर रहा था। जानकी रोहन को गले से लगाकर रोने लगी और गुरुचरण ने मोबाइल को तुरंत ही पटककर तोड़ दिया.. रोहन की जान बच गई।

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