ऐसा लगता है कि जांचकर्मियो को बच्चों की भविष्य की चिंता होती तो वे सर्वप्रथम विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता की जांच करते। लेकिन प्राथमिकता के आधार पर मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता व राशन स्टॉक की जांच से ऐसा प्रतीत होता है कि जांचकर्ता की चिंता बच्चों से ज्यादा अपनी जेब की है।
वही जांचकर्ता के रूप में विद्यालय पहुँचनेवालो में अधिकांश फर्जी लोग ही शामिल हो रहे है। जिनकी बातों से डरकर प्रधानाध्यापक चढ़ावा चढ़ाने को मजबूर हो जाते है। फर्जी जांचकर्मियो को देखकर ऐसा महसूस होता है कही न कही उन्हें पदाधिकारियो से मिलीभगत है। इसे देखते हुए वरीय पदाधिकारियो को चाहिए कि जांचकर्मियो की भी सत्यता की जांचोपरांत ही विद्यालयों में प्रवेश सुनिश्चित करें। साथ ही फर्जी लोगो के खिलाफ कड़ी कार्यवाई करे ताकि भ्र्ष्टाचार में कमी हो सके।
फोटो:- जर्नलिस्ट वेद प्रकाश
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