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चांडिल गोल चक्कर में झारखंड दिशोम बाहा सरहुल महोत्सव आयोजित

सरहुल महापर्व प्रकृति का पूजा व आराधना

शशि भूषण महतो, दैनिक समाज जागरण,अनुमंडल संवाददाता(चांडिल)

चांडिल : चांडिल गोल चक्कर में आयोजित भारत के आदिवासी समाज के प्राचीन सांस्कृतिक त्यौहार झारखंड दिशोम बाहा सरहूल महोत्सव में प्राचीन संस्कृति का रूप रंग से प्रकृति में खुशनुमा माहौल बना।

इस अवसर पर जाहेर थान में माझी बाबा, नायके आदि द्वारा शाल वृक्ष का पारंपरिक रूप से पूजा अर्चना किया गया। बच्चे, यूवा पुरुष – महिलाओं द्वारा पारंपरिक वस्त्र पहन कर सरहुल नृत्य प्रस्तुत किया गया।

यह उत्सव चैत्र महीने चैत्र शुक्ल पक्ष में मनाया जाता है। यह नए साल की शुरुआत की संदेश है। हालांकि इस त्योहार की कोई निश्चित तारीख नहीं होती है। विभिन्न गांवों में इसे विभिन्न दिनों पर मनाया जाता है। इस वार्षिक महोत्सव को बसंत ऋतु के दौरान मनाया जाता है और इसमें पेड़ों और प्रकृति के अन्य तत्वों की पूजा शामिल होती है। इस समय शाल, पलाश, महुआ एवं अन्य वनफुल के पेड़ों पर फूल खिलता है। वनफुल के सुगंध से वातावरण सुगंधित हो जाता है। उन्होंने कहा कि झारखंड के स्थानीय जनजातियां नए साल के आगमन पर ‘सरहुल’ पर्व पूरे धूम-धाम के साथ मनाते है। आदिवासियों की परंपरा के अनुसार इस पर्व के बाद नए फसल काटा जाता है।
इस मौके पर संयोजक गुरुचरण किस्कू,सह संयोजक चारूचांद किस्कू,ताराचांद मांझी,बुद्धेश्वर मार्डी,गुरुपद हांसदा, सुगी हांसदा,बैधनाथ टुडू,सुदामा हेम्ब्रम,मोतीलाल सोरेन,सोनाराम मार्डी, सोमाय टुडू,सुमित टुडू,अजय टुडू,संजय हांसदा आदि हजारो- हजार महिला- पुरूष उपस्थित थे।


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