दैनिक समाज जागरण 19.9.2026 चांद कुमार लायेक (ब्यूरो चीफ) पूर्वी सिंहभूम जमशेदपुर
विधायक संजीव सरदार के नेतृत्व में पोटका में जनसभा, जमशेदपुर और डुमरिया प्रखंड मुख्यालय में भी प्रदर्शन; केंद्र सरकार पर झारखंड के खनिज अधिकार सीमित करने का आरोप
पोटका जमशेदपुर खान एवं खनिज (विकास और रेगुलेशन) संशोधन बिल, 2026 के विरोध में शनिवार को झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने पोटका विधानसभा क्षेत्र में व्यापक विरोध प्रदर्शन किया। पोटका, जमशेदपुर और डुमरिया प्रखंड मुख्यालयों में आयोजित कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में ग्रामीण महिला-पुरुष और पार्टी कार्यकर्ता शामिल हुए। झामुमो की ओर से पोटका में करीब पांच हजार लोगों के शामिल होने का दावा किया गया। प्रदर्शन के बाद संबंधित प्रखंडों में अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर बिल के प्रावधानों पर विरोध दर्ज कराया गया।
एमएमडीआर संशोधन बिल, 2026 को 10 अगस्त 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था और लोकसभा तथा राज्यसभा से अगस्त में पारित होने के बाद यह खनिज-अधिकार और खनिजयुक्त भूमि पर राज्यों की कर लगाने की शक्तियों को लेकर चर्चा का विषय बना। बिल में केंद्र सरकार को खनिजयुक्त भूमि के नियमन से संबंधित अतिरिक्त अधिकार देने तथा राज्यों द्वारा खनिज अधिकारों और खनिजयुक्त भूमि पर कुछ कर, सेस या अन्य लेवी लगाने पर केंद्र द्वारा निर्धारित शर्तें लागू करने का प्रावधान है।
पोटका में विधायक संजीव सरदार ने किया नेतृत्व
झामुमो पोटका प्रखंड कमेटी की ओर से आयोजित धरना-प्रदर्शन में विधायक संजीव सरदार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि झारखंड की खनिज संपदा और उससे जुड़े अधिकारों की रक्षा के लिए राज्य की जनता को लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करनी होगी।
विधायक ने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनावों में भाजपा झामुमो और हेमंत सोरेन के नेतृत्व को चुनौती देने में सफल नहीं हो सकी, इसलिए अब केंद्र की नीतियों के माध्यम से झारखंड के खनिज संसाधनों पर अधिकार बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने इसे केंद्र और राज्य के अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताया।
‘खनिज संपदा झारखंड की, अधिकार भी झारखंड का होना चाहिए’
संजीव सरदार ने कहा कि झारखंड की धरती के नीचे मौजूद खनिज यहां की प्राकृतिक संपदा है और इससे होने वाले राजस्व का लाभ राज्य के विकास तथा आम लोगों तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने कहा कि जल, जंगल, जमीन और खनिज से जुड़े अधिकारों की रक्षा के लिए झामुमो लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रखेगा।
उन्होंने झारखंड आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस तरह राज्य निर्माण के आंदोलन में आम लोगों ने अपने अधिकारों के लिए संघर्ष किया था, उसी तरह मौजूदा परिस्थितियों में भी जनता को अपने अधिकारों के सवाल पर एकजुट होने की जरूरत है। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से एमएमडीआर बिल के खिलाफ लोकतांत्रिक आंदोलन में भाग लेने की अपील की।
जनकल्याणकारी योजनाओं को लेकर भी केंद्र पर निशाना
विधायक संजीव सरदार ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीतियों का असर राज्य की जनकल्याणकारी योजनाओं पर पड़ सकता है। उन्होंने मंईयां सम्मान योजना, पेंशन योजना और अबुआ आवास योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि झारखंड सरकार की योजनाओं को कमजोर करने के प्रयासों का विरोध किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि झारखंड की जनता के सहयोग से आंदोलन को सड़क से सदन तक ले जाया जाएगा। उनके अनुसार, प्रदर्शन में जुटी भीड़ इस बात का संकेत है कि राज्य के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर लोग अपनी आवाज उठाने के लिए तैयार हैं।
तीनों प्रखंडों में एक साथ प्रदर्शन
झामुमो के अनुसार, पोटका विधानसभा क्षेत्र के तीनों प्रखंड मुख्यालयों में एक साथ विरोध कार्यक्रम आयोजित किया गया। पोटका में करीब पांच हजार लोगों के शामिल होने का दावा किया गया, जबकि जमशेदपुर और डुमरिया प्रखंड मुख्यालय में भी बड़ी संख्या में ग्रामीण और पार्टी कार्यकर्ता पहुंचे।
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने एमएमडीआर बिल के खिलाफ नारे लगाए और केंद्र सरकार से इसके प्रावधानों पर पुनर्विचार की मांग की। इसके बाद अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर पार्टी की आपत्तियां दर्ज कराई गईं।
34 पंचायतों से पहुंचे कार्यकर्ता
पोटका के कार्यक्रम में विधानसभा क्षेत्र की विभिन्न पंचायतों से कार्यकर्ता और ग्रामीण शामिल हुए। झामुमो के अनुसार, पोटका प्रखंड की सभी 34 पंचायतों से प्रतिनिधि और कार्यकर्ता कार्यक्रम में पहुंचे। कार्यक्रम में पर्यवेक्षक मोहन कर्मकार, वरिष्ठ नेता राजू गिरि, झारखंड आंदोलनकारी सुनील महतो, बबलू चौधरी, पूर्व पार्षद चंद्रावती महतो, हीरामनी मुर्मू, रजनी षांडगी, भुगलु टुडू, कार्तिक मुर्मू, बाघराय सोरेन, दुखु मार्डी, सुधीर सोरेन, भुवनेश्वर सरदार, हितेश भगत, चक्रधर महतो, मो. जमाल, भूपति महतो, बनमाली महतो, बीरेन पात्र, दीपक भगत समेत बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी, पंचायत प्रतिनिधि और ग्रामीण मौजूद रहे।
संगठनात्मक एकजुटता का किया प्रदर्शन
एक ही दिन पोटका विधानसभा क्षेत्र के तीन प्रखंड मुख्यालयों में विरोध प्रदर्शन के जरिए झामुमो ने अपनी संगठनात्मक सक्रियता प्रदर्शित की। पोटका में विधायक संजीव सरदार ने कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों को संबोधित करते हुए आंदोलन को गांव-गांव तक ले जाने का आह्वान किया।
एमएमडीआर बिल को लेकर केंद्र सरकार का तर्क है कि राज्यों द्वारा अलग-अलग कर, सेस और अन्य लेवी लगाए जाने से खनन लागत और अनिश्चितता बढ़ सकती है। वहीं इस विधेयक पर PRS Legislative Research ने राज्यों की खनिज अधिकारों और खनिजयुक्त भूमि पर कर लगाने की शक्तियों पर संभावित असर को विचारणीय मुद्दा बताया है।
प्रदर्शन के दौरान झामुमो नेताओं ने स्पष्ट किया कि खनिज संपदा से जुड़े अधिकारों और राज्य के हितों के सवाल पर पार्टी अपना आंदोलन जारी रखेगी। पोटका में जुटी बड़ी भीड़ और तीनों प्रखंडों में एक साथ हुए कार्यक्रम को पार्टी ने अपने अभियान की आगे की रणनीति के लिए महत्वपूर्ण बताया।
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