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लोकल मजदूरों के शोषण के खिलाफ नीलकंठ कंपनी पर हड़ताल, 7 घंटे ठप रहा परिवहन



अनूपपुर। अनूपपुर जिले के अमाडांड ओसीपीएम परियोजना में लोकल मजदूरों के शोषण को लेकर मैसर्स नीलकंठ इंजीनियरिंग लिमिटेड के खिलाफ शनिवार को ग्रामीणों और मजदूरों ने जोरदार हड़ताल की। निमहा पंचायत सहित आसपास की पंचायतों के मजदूर, सरपंच और जनप्रतिनिधि बड़ी संख्या में हड़ताल में शामिल हुए। हड़ताल के चलते परियोजना का परिवहन करीब 7 घंटे तक पूरी तरह बंद रहा, जिससे कंपनी प्रबंधन पर दबाव बना।

नीलकंठ कंपनी कर रही थी लगातार शोषण

मजदूरों और ग्रामीणों का आरोप है कि नीलकंठ कंपनी द्वारा लंबे समय से न्यूनतम मजदूरी दर का उल्लंघन, सुरक्षा उपकरणों की कमी, ईएसआई-पीएफ जैसी सुविधाओं से वंचित रखना और भू-प्रभावितों को रोजगार के नाम पर छल किया जा रहा है। पूर्व में शिकायतों और ज्ञापनों के बावजूद कोई कार्रवाई न होने से आक्रोश और बढ़ गया। कंपनी लगातार कर्मचारी और लोकल मजदूरों का शोषण कर रही थी जिस कारण से आज शनिवार के दिन कंपनी में कार्य कर रहे हैं मजदूर और कर्मचारियों ने एक दिवसीय हड़ताल किया।


कंपनी ने मांगा 3 दिन का समय, समिति गठन का आश्वासन

लगातार बढ़ते दबाव और परिवहन ठप होने के बाद कंपनी प्रबंधन  और उप क्षेत्रीय प्रबंधन ने मजदूरों से बातचीत की। बातचीत के दौरान कंपनी की ओर से 3 दिन का समय मांगा गया और मजदूरों की मांगों पर विचार करने के लिए संयुक्त समिति के गठन का आश्वासन दिया गया। 30 दिसंबर को बैठक कर पूरे मामले में दुबारा चर्चा कर निर्णय लेने की बात की गई है। आश्वासन के बाद मजदूरों ने फिलहाल हड़ताल स्थगित कर दी, जिसके बाद परिवहन व्यवस्था पुनः शुरू हो सकी।
सरपंच ने दी चेतावनी

निमहा पंचायत की सरपंच श्रीमती जमुनी बाई ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि तय समय सीमा में मजदूरों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ और शोषण जारी रहा तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि लोकल और भू-प्रभावित मजदूरों के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मजदूरों की प्रमुख मांगें,

हड़ताल में बैठ के मजदूरों की प्रमुख मांगे थे कि सरकार द्वारा तय न्यूनतम मजदूरी दर का पालन, ईएसआई, पीएफ और वेतन पर्ची की सुविधा, सुरक्षा उपकरण, चिकित्सा और पीने के पानी की व्यवस्था, भू-प्रभावितों को स्थायी और सुरक्षित रोजगार , लंबित बकाया मजदूरी का भुगतान हड़ताल किया गया था जिस पर आश्वासन के बाद हड़ताल समाप्त कर दी गई। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कंपनी और प्रबंधन अपने आश्वासन पर कितना अमल करते हैं, या फिर आने वाले दिनों में मजदूरों का आंदोलन दोबारा तेज होता है।

इनका कहना है।

बहुत सी खामियां आज सामने नजर आई है जिसकी जानकारी नही थी, मांगों पर 3 दिन का समय मांगा गया है, बैठक पर मांगों पर विचार किया जाएगा।

प्रणव पटेल, जीएम नीलकंठ प्राइवेट लिमिटेड


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