प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना में बड़ा घोटाला: ओबरा व रिहन्द डैम में मछली पालन केवल कागज़ों में

सरकारी योजना बनी मज़ाक

अनिल कुमार अग्रहरी/ समाज जागरण

डाला /सोनभद्र। जनपद सोनभद्र के ओबरा एवं रिहन्द डैम में प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के अंतर्गत लगाए गए लगभग 700 केज में बड़े पैमाने पर अनियमितता और भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। योजना के तहत प्रत्येक लाभार्थी को 12 लाख रुपये की परियोजना में 4.80 लाख रुपये स्वयं तथा 7.20 लाख रुपये सरकारी अनुदान के रूप में दिए गए, लेकिन हकीकत में अधिकांश केजों पर मछली पालन हुआ ही नहीं।


स्थलीय स्थिति का जायजा लेने पर सामने आया कि करीब 75 प्रतिशत केजों में एक भी मछली पालन नहीं किया गया, न ही किसी केज पर लाभार्थी का आईडी नंबर या पहचान अंकित है। जांच के दौरान केवल 25 प्रतिशत सक्रिय केज दिखाकर विभागीय टीम को गुमराह कर खाना पूर्ति की जाती है।
बिचौलियों का पूरा नेटवर्क सक्रिय
सूत्रों के अनुसार, यह पूरा खेल बिचौलियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से चल रहा है। केज पास कराने से लेकर उनकी स्थापना तक सारी प्रक्रिया बिचौलियों द्वारा नियंत्रित की गई। लाभार्थियों को न तो कभी केज पर देखा गया और न ही अधिकांश लाभार्थियों को यह जानकारी है कि उनके नाम का केज आखिर कहां लगाया गया है।


वीडियो में खुलासा, बच्चों तक नहीं डाले गए।
जांच के दौरान बिचौलिया हिमांचल साहनी केज स्थल पर मौजूद होकर वीडियो शूट करता दिखा, जिसमें उसने दावा किया कि सदाफल नामक बिचौलिया के केज में एक भी मछली के बच्चे नहीं डाले गए, इसके बावजूद सरकारी धन का भुगतान करा लिया गया। यह वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है।


अधिकारी का चौंकाने वाला बयान
मामले में जब मौखिक शिकायत सहायक मत्स्य निदेशक, सोनभद्र से की गई तो उन्होंने कहा कि “हमें सरकार ने गाड़ी नहीं दी है कि हम मौके पर जाकर जांच करें। जिओ टैगिंग फील्ड ऑफिसर करते हैं। वे जो फोटो खींचकर देते हैं, उसी आधार पर भुगतान हो जाता है। यह काम मेरा नहीं है।”

यह बयान स्वयं में विभागीय लापरवाही और जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने का बड़ा प्रमाण माना जा रहा है।
सरकारी योजना बनी मज़ाक
करोड़ों रुपये की इस योजना में मछुआ किसानों को आत्मनिर्भर बनाने का सपना दिखाया गया था, लेकिन विभागीय मिलीभगत और बिचौलियों के खेल ने इसे मज़ाक बनाकर रख दिया है। अब सवाल यह है कि बिना मछली पालन के भुगतान कैसे हुआ ? जिओ टैगिंग और फोटो सत्यापन की जांच किसने की ?
जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी?
स्थानीय लोगों और समाजसेवियों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच, भुगतान की रिकवरी और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

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