वीरेंद्र चौहान, समाज जागरण ब्यूरो, किशनगंज।
25 फरवरी।
जन्मजात बीमारियों और शारीरिक विकृतियों से जूझ रहे बच्चों के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम आज केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि समाज के सबसे कमजोर तबके के लिए जीवन बदलने वाली पहल बन चुका है। यह कार्यक्रम बच्चों की प्रारंभिक अवस्था में ही स्वास्थ्य जांच कर गंभीर बीमारियों की पहचान करता है और उन्हें महंगे इलाज के बोझ से मुक्त करते हुए निःशुल्क विशेषज्ञ उपचार तक पहुंचाता है।
गरीब और ग्रामीण परिवारों के लिए, जहां इलाज की लागत अक्सर असंभव हो जाती है, वहीं इस कार्यक्रम ने यह साबित किया है कि सही समय पर पहचान और सरकारी सहयोग से बच्चा विकलांगता से बचकर सामान्य जीवन की ओर लौट सकता है।
इसी कड़ी में क्लबफुट से पीड़ित दो बच्चों — रफिया नाज़ और सिदर फातमी — को सदर अस्पताल, किशनगंज से निःशुल्क इलाज के लिए Jawaharlal Nehru Medical College and Hospital, भागलपुर भेजा गया। यह रेफरल पूरी प्रक्रिया के तहत किया गया, ताकि बच्चों को विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में समय पर उपचार मिल सके और भविष्य में किसी प्रकार की स्थायी परेशानी न हो।
क्लबफुट क्या है और इलाज में देरी क्यों खतरनाक?
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने बताया कि क्लबफुट एक जन्मजात विकृति है, जिसमें बच्चे के पैर अंदर की ओर मुड़े होते हैं। यदि शुरुआती महीनों में इसका उपचार न किया जाए, तो आगे चलकर बच्चे को चलने-फिरने, पढ़ाई और सामाजिक जीवन में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, सही समय पर प्लास्टर चढ़ाने की विधि और पोंसेटी पद्धति से क्लबफुट को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है और बच्चा सामान्य बच्चों की तरह जीवन जी सकता है।
“समय पर इलाज से बच्चा पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है”
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि क्लबफुट जैसी जन्मजात समस्या का यदि समय रहते इलाज हो जाए, तो बच्चा पूर्णतः सामान्य जीवन जी सकता है। कार्यक्रम के माध्यम से आज दोनों बच्चों को भागलपुर स्थित मेडिकल कॉलेज भेजा गया है, जहां उनका उपचार पूरी तरह निःशुल्क किया जाएगा।
उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच अवश्य कराएं और किसी भी असामान्यता की स्थिति में तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें, ताकि समय रहते उचित उपचार सुनिश्चित किया जा सके।
जिले में कार्यक्रम की टीम गांव-गांव जाकर बच्चों की जांच कर रही है, ताकि क्लबफुट सहित अन्य जन्मजात बीमारियों की समय पर पहचान हो सके और कोई भी बच्चा केवल जानकारी या संसाधनों के अभाव में इलाज से वंचित न रह जाए।



