आधार से नागरिकता का दावा नहीं: सुप्रीम कोर्ट; 50 लाख वोटर्स के दस्तावेज़ों की होगी जांच

28 फरवरी के बाद आएगी सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट, ज्यूडिशियल ऑफिसर्स करेंगे वेरिफिकेशन

दैनिक समाज जागरण |

नई दिल्ली/कोलकाता। वोटर वेरिफिकेशन प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा स्पष्टिकरण दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि आधार कार्ड का इस्तेमाल नागरिकता साबित करने के लिए नहीं किया जा सकता, बल्कि इसे केवल पहचान के उद्देश्य से ही उपयोग किया जाएगा। कोर्ट ने साथ ही 50 लाख मतदाताओं के दस्तावेज़ों की जांच के लिए ज्यूडिशियल ऑफिसर्स की तैनाती को मंजूरी दी है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली शामिल थे, ने यह आदेश उस समय दिया जब कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने वेरिफिकेशन की समय-सीमा को लेकर चिंता जताई।


50 लाख वोटर्स के दस्तावेज़ों की जांच

कोर्ट को बताया गया कि 294 मौजूदा और सेवानिवृत्त जिला व अतिरिक्त जिला जजों को SIR कार्य सौंपा गया है। यदि एक ज्यूडिशियल ऑफिसर प्रतिदिन 250 मामलों का निपटारा भी करे, तो भी 50 लाख वोटर्स के दस्तावेज़ों की जांच में कम से कम 80 दिन लगेंगे।

बेंच ने निर्देश दिया कि तीन वर्ष के अनुभव वाले और ज्यूडिशियल ऑफिसर्स को भी इस काम में लगाया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर पड़ोसी राज्यों झारखंड और ओडिशा से भी अनुभवी अधिकारियों को बुलाने की अनुमति दी गई है।


28 फरवरी के बाद आएगी सप्लीमेंट्री लिस्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारतीय निर्वाचन आयोग 28 फरवरी को फाइनल वोटर लिस्ट प्रकाशित करेगा। जिन मतदाताओं के दस्तावेज़ों की जांच प्रक्रिया लंबित रहेगी, उनके नाम सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट में शामिल किए जाएंगे, जिसे बाद में जारी किया जाएगा।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि EC द्वारा नोटिफाइड 11 दस्तावेज़ों के अलावा क्लास X का एडमिट कार्ड और मार्कशीट भी दावा पेश करने के लिए वैध माने जाएंगे।


आधार सिर्फ पहचान के लिए

बेंच ने साफ शब्दों में कहा,

“नागरिकता का दावा करने के लिए आधार के इस्तेमाल का कोई सवाल ही नहीं है।”

कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि केवल उन्हीं मतदाताओं के मामलों की जांच होगी जिन्होंने 14 फरवरी तक अपने दस्तावेज़ जमा कर दिए हैं।


खर्च EC उठाएगा

आर्टिकल 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का प्रयोग करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि झारखंड और ओडिशा से बुलाए जाने वाले ज्यूडिशियल ऑफिसर्स के वेतन और ठहरने का खर्च चुनाव आयोग वहन करेगा।


नकली आधार पर उठे सवाल

सुनवाई के दौरान अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में बड़ी संख्या में अवैध प्रवासियों के आधार कार्ड बने हैं और कोर्ट से इस पर निर्देश देने की मांग की।

इस पर बेंच ने कहा कि यह मामला विस्तृत जांच का विषय है और फिलहाल इस पर आदेश देना उचित नहीं होगा। जस्टिस बागची ने सुझाव दिया कि उपाध्याय इस संबंध में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को प्रतिनिधित्व दें।


SIR देख रहे जजों को बम की धमकी

इधर, कोलकाता, पश्चिम बर्दवान, हुगली और मुर्शिदाबाद में SIR प्रक्रिया की निगरानी कर रहे जिला जजों को सुसाइड बम और RDX धमाकों की धमकी वाले फर्जी ईमेल भेजे गए। इसके बाद कम से कम छह अदालतों में सुरक्षा ड्रिल कराई गई, लेकिन तलाशी में कोई विस्फोटक नहीं मिला।

राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती ने इन धमकियों को फर्जी बताया।

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