नई दिल्ली। एनसीईआरटी की पुस्तक में न्यायपालिका से जुड़े विवादित अध्याय को लेकर चल रहे विवाद पर जे.एस. राजपूत ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि पूरा देश सुप्रीम कोर्ट का सम्मान करता है, लेकिन इस मामले में एनसीईआरटी की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है।
पूर्व निदेशक ने कहा कि यदि दोनों संस्थानों के बीच मतभेद थे तो बातचीत के जरिए समाधान निकाला जा सकता था। उनके अनुसार, सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्द—“साजिश” और “स्कैंडलस”—अनावश्यक थे। उन्होंने कहा कि एनसीईआरटी हर वर्ष प्राप्त सुझावों के आधार पर अपनी पुस्तकों में संशोधन करता है और किसी भी त्रुटि को सुधारा जा सकता था।
राजपूत ने यह भी कहा कि “गलती इंसान से होती है” और न्यायपालिका से भी निर्णयों में त्रुटि हो सकती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति 15 वर्ष बाद बरी होता है तो उसके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता होगा, इस पर भी विचार होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार जैसे विषयों पर लिखा जाना चाहिए, लेकिन न्यायपालिका की ओर से इतनी कठोर प्रतिक्रिया आवश्यक नहीं थी। उनके अनुसार, यह मामला आपसी संवाद से सुलझाया जा सकता था और इससे एनसीईआरटी की साख पर जो आंच आई है, उसे टाला जा सकता था।



