मानवाधिकार उल्लंघन का प्रथम दृष्टया मामला मानते हुए आयोग ने जारी किया नोटिस, प्रदूषण और जनस्वास्थ्य पर मांगा विस्तृत प्रतिवेदन
वीरेंद्र चौहान, समाज जागरण ब्यूरो किशनगंज।
31 जुलाई।
मोतीबाग स्थित डंपिंग यार्ड में खुलेआम ठोस कचरा फेंकने और उसे जलाने से फैल रहे प्रदूषण के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने शिकायत को प्रथम दृष्टया मानवाधिकारों के उल्लंघन का मामला मानते हुए बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (BSPCB) के अध्यक्ष को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर मामले की जांच कर विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
यह कार्रवाई राष्ट्रीय आरटीआई एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता मोहम्मद अंसार खान द्वारा दायर शिकायत (प्रकरण संख्या 834/4/18/2026) पर की गई है। आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो की पीठ ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा-12 के तहत मामले का संज्ञान लेते हुए कहा कि शिकायत में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया मानवाधिकारों के उल्लंघन के प्रतीत होते हैं। ऐसे में मामले की निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच आवश्यक है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि किशनगंज नगर परिषद द्वारा मोतीबाग स्थित घनी आबादी वाले क्षेत्र में लंबे समय से ठोस कचरे का अवैज्ञानिक ढंग से निस्तारण किया जा रहा है। डंपिंग यार्ड में बार-बार कचरे में आग लगाए जाने से जहरीला धुआं, दुर्गंध और गंभीर वायु प्रदूषण फैल रहा है। इसका प्रतिकूल प्रभाव आसपास रहने वाले बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों तथा अन्य नागरिकों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। शिकायत में श्वास संबंधी बीमारियों, संक्रमण और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का भी उल्लेख किया गया है।
शिकायतकर्ता ने आयोग को बताया कि इस गंभीर समस्या को लेकर पूर्व में कई बार स्थानीय प्रशासन, नगर परिषद और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े अधिकारियों के समक्ष शिकायतें की गईं, लेकिन प्रभावी एवं स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। शिकायत में इसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत प्रदत्त जीवन के अधिकार तथा स्वच्छ एवं स्वस्थ पर्यावरण में जीने के अधिकार का उल्लंघन बताया गया है।
आयोग ने बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिया है कि पूरे मामले की वस्तुस्थिति की जांच कर चार सप्ताह के भीतर विस्तृत कार्रवाई प्रतिवेदन आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद आयोग मामले में आगे की कार्रवाई करेगा।
गौरतलब है कि मोतीबाग डंपिंग यार्ड से उठने वाले धुएं और प्रदूषण को लेकर स्थानीय लोग लंबे समय से विरोध जता रहे हैं। इस मामले में पहले भी पर्यावरणीय मानकों के उल्लंघन को लेकर विभिन्न स्तरों पर शिकायतें उठती रही हैं। अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के हस्तक्षेप से संबंधित विभागों की जवाबदेही तय होने की उम्मीद बढ़ गई है।
यदि जांच में शिकायत के आरोप सही पाए जाते हैं तो नगर परिषद की कचरा प्रबंधन व्यवस्था, पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन तथा संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं। फिलहाल पूरे मामले पर लोगों की निगाहें बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि वर्षों से चली आ रही इस गंभीर पर्यावरणीय एवं जनस्वास्थ्य समस्या के समाधान के लिए क्या ठोस और प्रभावी कार्रवाई की जाती है।
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