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नई पीढ़ी पर शंका नहीं, भरोसा करने की जरूरत : सरयू राय

दैनिक समाज जागरण 30.08.2026 चांद कुमार लायेक (ब्यूरो चीफ) पूर्वी सिंहभूम जमशेदपुर

जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने पुरानी और नई पीढ़ी के बीच सोच के अंतर को स्वाभाविक बताते हुए कहा कि नई पीढ़ी पर शंका करने के बजाय उस पर विश्वास करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी बदलती परिस्थितियों और आधुनिक तकनीक के दौर में बड़ी हो रही है। ऐसे में उसका सोचने और काम करने का तरीका पुरानी पीढ़ी से अलग होना स्वाभाविक है। पुरानी पीढ़ी को अपने अनुभवों के आधार पर नई पीढ़ी का आकलन करने के बजाय उसे आगे बढ़ने और नए प्रयोग करने का अवसर देना चाहिए।

सरयू राय सोनारी में छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक समिति की ओर से आयोजित श्री श्री श्रावणी रामायण पाठ के समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पुरानी पीढ़ी अक्सर यह मान लेती है कि नई पीढ़ी उतना नहीं कर रही है या उतना नहीं कर पाएगी, जितना पिछली पीढ़ी ने किया। यह सोच उचित नहीं है। समय, परिस्थितियां और सामाजिक परिवेश बदलने के साथ सोचने के तरीके में बदलाव भी स्वाभाविक है।

उन्होंने भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा अपनी बेटी इंदिरा गांधी को लिखे पत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि पुरानी पीढ़ी अपने अनुभवों, मान्यताओं और पुराने तौर-तरीकों के आधार पर दुनिया को देखने की आदी होती है। इसके विपरीत नई पीढ़ी अलग समय और परिस्थितियों में जन्म लेती है। इसलिए उसकी सोच और कार्यशैली भी अलग होती है। केवल इस वजह से नई पीढ़ी की सोच को गलत नहीं माना जा सकता कि वह पुरानी पीढ़ी की सोच से अलग है।

सरयू राय ने कहा कि पुरानी पीढ़ी का अनुभव समाज के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन अनुभव को नई पीढ़ी की स्वतंत्र सोच और नए प्रयोगों के रास्ते में बाधा नहीं बनने देना चाहिए। अनुभव और नई सोच का समन्वय ही समाज को बेहतर दिशा दे सकता है।

मोबाइल के इस्तेमाल पर भी रखी बात

नई पीढ़ी के बीच मोबाइल फोन और स्मार्टफोन के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर होने वाली आलोचना पर भी सरयू राय ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आज लगभग हर हाथ में स्मार्टफोन है। इसलिए सवाल यह नहीं है कि युवा मोबाइल का इस्तेमाल करता है या नहीं, बल्कि महत्वपूर्ण यह है कि वह इसका इस्तेमाल किस उद्देश्य के लिए कर रहा है।

उन्होंने कहा कि यदि कोई युवा मोबाइल के माध्यम से ज्ञान, शिक्षा, रोजगार अथवा अपने काम से जुड़ी उपयोगी जानकारी हासिल करता है तो तकनीक उसके लिए बेहद लाभकारी साबित हो सकती है। वहीं, यदि वह अनावश्यक और उल-जुलूल चीजों में अपना समय बर्बाद करता है तो वही मोबाइल परेशानी का कारण बन सकता है।

सरयू राय ने कहा, “टेक्नोलॉजी को मालिक बनाइएगा तो बर्बाद हो जाइएगा। टेक्नोलॉजी को सेवक के रूप में रखेंगे तो कल्याण हो जाएगा।” उन्होंने कहा कि तकनीक का इस्तेमाल किस दिशा में किया जाए, यह व्यक्ति के हाथ में है। सही उद्देश्य और सकारात्मक सोच के साथ तकनीक व्यक्ति, समाज और देश के लिए वरदान साबित हो सकती है।

रामायण पाठ से समझाया तकनीक का सकारात्मक उपयोग

विधायक ने रामायण पाठ का उदाहरण देते हुए तकनीक के सकारात्मक इस्तेमाल को समझाया। उन्होंने कहा कि पहले कुछ लोग एक साथ बैठकर रामायण पाठ करते थे और वहां जितने लोग मौजूद रहते थे, उतने ही लोग उसका श्रवण कर पाते थे। उस समय लाउडस्पीकर की सुविधा नहीं थी। बाद में तकनीक के विकास के साथ लाउडस्पीकर आया तो रामायण पाठ की आवाज दूर तक पहुंचने लगी और इसे सुनने वालों की संख्या सैकड़ों और हजारों तक पहुंच गई।

उन्होंने कहा कि आज मोबाइल फोन और इंटरनेट ने इस पहुंच को और व्यापक बना दिया है। रामायण पाठ का सीधा प्रसारण दुनिया के किसी भी हिस्से में बैठे व्यक्ति तक पहुंच सकता है। यह तकनीक के सकारात्मक इस्तेमाल का उदाहरण है।

सरयू राय ने कहा कि मोबाइल और तकनीक को दोष देने के बजाय उसके इस्तेमाल की दिशा पर ध्यान देना चाहिए। तकनीक को अपने ऊपर हावी करने के बजाय उसे अपने उद्देश्य की पूर्ति का साधन बनाना जरूरी है।

उन्होंने पुरानी पीढ़ी से नई पीढ़ी के प्रति अविश्वास का भाव छोड़ने की अपील करते हुए कहा कि युवाओं को अवसर और विश्वास दोनों की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अनुभव और नई सोच मिलकर समाज को आगे ले जा सकते हैं। अंत में उन्होंने विश्वास जताया, “नई पीढ़ी पर भरोसा कीजिए। निश्चित जानिए कि नई पीढ़ी बढ़िया करेगी।”


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