शहडोल। पंडित शंभूनाथ शुक्ला विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर रामशंकर दुबे ने आज विश्वविद्यालय परिसर में लेखक,पत्रकार व समाजसेवी डॉ पंकज शर्मा द्वारा रचित नई पुस्तक “खेल चिकित्सा और पुनर्वास” का विधिवत विमोचन किया। यह पुस्तक इनकी पांचवीं पुस्तक है और Amazon और flipkart जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध है। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति ने पुस्तक की महत्ता, लेखक की साधना और सम्पादक के योगदान की सराहना करते हुए इसे खेल विज्ञान और चिकित्सा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
कुलगुरु प्रोफेसर रामशंकर दुबे ने कहा कि वर्तमान परिवेश में जब जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है, ऐसी परिस्थिति में “खेल चिकित्सा और पुनर्वास” जैसे विषय अत्यंत प्रासंगिक हैं। कुलगुरु ने कहा कि यह पुस्तक हमारे युवा चिकित्सकों, खेल प्रशिक्षकों और पुनर्वास में कार्यरत पेशेवरों के लिए एक मार्गदर्शक साबित होगी। उन्होंने कहा कि इस पुस्तक में भारतीय ज्ञान परंपरा के उद्धरण भी दिए गए है इस पुस्तक में मुण्डकोपनिषद, अर्थवेद, कठोपनिषद, महाभारत और भगवतगीता के श्लोकों के माध्यम से भी खेल और खेल चिकित्सा के बारे विस्तृत जानकारियां समाहित हैं। डॉ. पंकज शर्मा की शोध-भूमि, ज्ञान-विस्तार और विज्ञान-प्रेरित प्रयासों को सराहते हुए कहा कि यह पुस्तक चिकित्सा जगत में एक स्थायी योगदान है।
आज खेल केवल शारीरिक गतिविधि भर नहीं रह गए हैं। यह अब विज्ञान, स्वास्थ्य और तकनीक से गहराई से जुड़ चुके हैं। चोटें खेलों का अभिन्न हिस्सा हैं, लेकिन चिकित्सा और पुनर्वास के वैज्ञानिक तरीकों से न केवल खिलाड़ी तेजी से ठीक हो सकते हैं, बल्कि उनके प्रदर्शन में भी उल्लेखनीय सुधार हो सकता है। डॉ. पंकज शर्मा की यह पुस्तक इस दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने पुस्तक की वैज्ञानिकता, व्यावहारिकता और भाषा की सरलता की सराहना की।
जब चिकित्सा, खेल और पुनर्वास तीनों क्षेत्रों का समन्वय होता है, तो ज़िंदगी को न केवल बेहतर बनाया जा सकता है, बल्कि स्वास्थ्य-नवनीकरण की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया जा सकता है।
कुलगुरु ने पुस्तक को अपने हाथों द्वारा अनावरण किया और उसे डॉ. पंकज शर्मा को सौंपा। इस दौरान उन्होंने पुस्तक की भाषा, शोध-गहराई, व्यावहारिक दिशा और वैज्ञानिक सटीकता की भी प्रशंसा की।
वहीं पंडित शंभूनाथ शुक्ला विश्वविद्यालय के शारीरिक शिक्षा विभाग (खेल विभाग) के डॉ. आदर्श तिवारी नें इस पुस्तक को लेकर कहा कि खेल चिकित्सा को लेकर लिखी गई यह पुस्तक … खेल चिकित्सा से जुडे छात्रों के लिये सरल हिंदी भाषा में समग्र जानकारी के समावेश की एक बेहतर रचना है… जिसका सीधा लाभ खेल से जुडे प्रत्येक छात्र व व्यक्तियों को मिल सकेगा ।
वहीं इस पुस्तक के संपादक डॉ जितेन्द्र शर्मा में लेखक डॉ. पंकज शर्मा को इस पुस्तक के विमोचन कि शुभकामनएं देते हुये कहा… खेल चिकित्सा एवं पुर्नवास से जुडी तमाम विषयों के विशाल संग्रह की यह एक अनूठी रचना है … जिसका फायदा इस क्षेत्र से जुडे प्रत्येक व्यक्ति को मिलेगा ….
लेखक डॉ. पंकज शर्मा का परिचय:
डॉ. पंकज शर्मा शहडोल के धनपुरी क्षेत्र के निवासी हैं। वर्षों से खेल और प्रशिक्षण में अपने नए नए शोध और लेख प्रकाशित करते आ रहे है साथ ही युवाओं को स्वावलंबी और रोजगार से जोड़ने के लिए पुलिस,भारतीय सेना और वर्दीधारी पदों के लिए निःशुल्क फिजिकल ट्रेनिंग का संचालन करते है। आपको बता दे कि यह ट्रेनिंग विगत 12 वर्षों से निःशुल्क संचालित कर रहे हैं। डॉ. शर्मा खेल चिकित्सा और पुनर्वास के क्षेत्र में वर्षों का अनुभव रखते हैं, ने इस पुस्तक के लेखन पर लगभग 2 वर्षों तक काम किया।
डॉ.पंकज शर्मा ने बताया कि “यह पुस्तक उन तमाम चुनौतियों को ध्यान में रखकर लिखी गई है, जिनका सामना खिलाड़ी, कोच और चिकित्सा विशेषज्ञ प्रतिदिन करते हैं। मेरा प्रयास रहा है कि यह पुस्तक न केवल चिकित्सकों के लिए उपयोगी हो, बल्कि खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों के लिए भी मार्गदर्शक साबित हो। इस पुस्तक में खेल चिकित्सा और योग,आयुर्वेद, खेल चोटों की पहचान और प्रकार, प्राथमिक चिकित्सा के आधुनिक तरीके, फिजियोथेरेपी और हाइड्रोथेरेपी तकनीकें, इलेक्ट्रोथेरेपी और खेल चिकित्सा में नवीन उपकरण, मानसिक स्वास्थ्य और पुनर्वास, पुनर्वास कार्यक्रमों की योजना और क्रियान्वयन, स्ट्रेचिंग और मजबूतीकरण की वैज्ञानिक पद्धतियाँ, चोटों की रोकथाम और खिलाड़ियों की सुरक्षा,क्लिनिकल केस स्टडी, पुनर्वास में आहार और पोषण, खेल चिकित्सा में अनुसंधान की नई दिशाएँ, भविष्य की संभावनाएँ और चुनौतियाँ, AI का स्पोर्ट्स परफॉर्मेंस में योगदान,महिला स्पोर्ट्स जैसे विषयों पर विस्तृत व्याख्या की गई है।
“संपादक डॉ. जीतेन्द्र शर्मा (एमबीबीएस, एमडी) का योगदान”:
पुस्तक के संपादक डॉ. जीतेन्द्र शर्मा, जो एक प्रतिष्ठित डॉक्टर है और शासकीय बिरसा मुंडा मेडिकल कॉलेज शहडोल में एसोसिएट प्रोफेसर हैं, ने पुस्तक के हर अध्याय की वैज्ञानिकता, संदर्भ और प्रस्तुति पर विशेष ध्यान दिया।
डॉ .शर्मा ने कहा कि “पुस्तक का उद्देश्य केवल सैद्धांतिक जानकारी देना नहीं है, बल्कि यह पाठकों को व्यावहारिक समाधान भी प्रदान करती है। इसमें केस स्टडी, आधुनिक तकनीकें और अनुसंधान आधारित,खेल चिकित्सा, दवाइयां,योग और आयुर्वेद , फिजियोथेरेपी को भी शामिल किए गए हैं।”
वही डॉ.पंकज शर्मा ने विशेष रूप से पंडित शंभूनाथ शुक्ला विश्वविद्यालय शहड़ोल के कुलगुरु प्रो. रामशंकर सेवानिवृत प्राचार्य श्री एम पी शर्मा,शारीरिक शिक्षा विभाग के संचालक डॉ. आदर्श तिवारी, रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के शारीरिक शिक्षा विभाग के संचालक डॉ. विशाल बन्ने, निजी सचिव डॉ. बृजेंद्र पाण्डेय,पुस्तक के संपादक,शहडोल मेडिकल कालेज के एसोसिएट प्रो. डॉ. जीतेन्द्र शर्मा, एन आई एस कोच श्री सुदर्शन सिंह, एमिटी विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रो. डॉ. पंकज पाण्डेय, डॉ. उद्यम सिंह, डॉ.अविनाश सिंह,और संगठन मंत्री श्री सावन सिंह अपने मित्रों, सहयोगियों और अपने परिवार का आभार व्यक्त किया ।



